भोपाल में दो थानों के CCTNS सिस्टम पर साइबर अटैक, लॉकबिट रैनसमवेयर की सेंधमारी से लॉक हुआ डेटा
भोपाल के अयोध्या नगर और शाहपुरा थाने के सीसीटीएनएस सिस्टम पर रैनसमवेयर अटैक से डेटा लॉक हुआ, जिसे बाद में रिकवर कर लिया गया।
Publish Date: Sun, 01 Nov 2026 02:05:37 PM (IST)Updated Date: Sun, 01 Nov 2026 02:05:37 PM (IST)
प्रतीकात्मक, एआई से तैयार फोटो। राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। भोपाल के अयोध्या नगर और शाहपुरा थाने के क्राइम एंड क्रिमिनल नेटवर्क एवं सिस्टम (सीसीटीएनएस) अटैक की जानकारी सामने आने के बाद मध्य प्रदेश साइबर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (एमपी-सर्ट) ने एडवाइजरी जारी की है। इसमें पुलिस के कंप्यूटर और नेटवर्क को लॉकबिट रैनसमवेयर से खतरा बताते हुए आगाह किया गया है।
बताया गया है कि इस साइबर हमले के जरिए न सिर्फ कंप्यूटर की फाइलों को लॉक किया जा सकता है, बल्कि पुलिस के नेटवर्क में प्रवेश कर सर्वर और दूसरे कंप्यूटरों तक भी पहुंच बनाई जा सकती है।
इससे थानों में दर्ज मामलों, जांच और अन्य महत्वपूर्ण डेटा के प्रभावित होने का जोखिम है। इन दोनों थानों में भी अटैक के बाद डेटा लॉक हो गया था, जिसे सुधार लिया गया है। अभी तक किसी तरह से डेटा चोरी होने की जानकारी सामने नहीं आई है।
थानों की हार्ड डिस्क की जांच एमपी सर्ट और स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की टीम कर रही है।
विंडोज सिस्टम किए जा रहे अपडेट
बता दें कि इससे पहले प्रदेश की सरकारी वेबसाइटों में पीएचपी की तकनीकी खामियों से साइबर हमले का जोखिम सामने आया था। एमपी-सर्ट के संयुक्त संचालक वैभव श्रीवास्तव ने बताया कि एडवाजरी जारी कर सतर्कता बरतने के लिए कहा गया है।
सभी विंडोज सिस्टम को अपडेट रखने, प्रमाणित एंटीवायरस और ईडीआर इस्तेमाल करने, मजबूत पासवर्ड और मल्टी फैक्टर अथेंटिकेशन अपनाने तथा नियमित बैकअप लेने की सलाह दी है।
पेन ड्राइव पर रोक
पेन ड्राइव के इस्तेमाल से बचने और नेटवर्क को अलग-अलग हिस्सों में बांटने को भी कहा गया है। एडवाइजरी में कहा गया है लॉकबिट रैनसमवेयर कंप्यूटर की फाइलों को एन्क्रिप्ट यानी डेटा को लॉक कर देता है। इसकी खास बात यह है कि यह केवल फाइलों को लॉक नहीं करता, बल्कि डेटा चुराकर सार्वजनिक करने की धमकी भी दे सकता है।
हमले के दौरान यह कंप्यूटर की सुरक्षा प्रणाली को निष्क्रिय करने, बैकअप की शैडो कॉपी मिटाने और विंडोज के सिक्योरिटी लॉग तक डिलीट करने में सक्षम है। कमजोर पासवर्ड, फिशिंग ईमेल, इंटरनेट पर खुले रिमोट डेस्कटॉप और पुराने सॉफ्टवेयर के जरिए हमलावर सिस्टम में प्रवेश कर सकते हैं।