
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल: शहर के भारत माता चौराहे से लिली टॉकीज तक के मेट्रो रूट को अंडरग्राउंड करने की मांग पर अब विराम लगता नजर आ रहा है। मेट्रो प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि 5.5 किमी लंबे इस रूट को भूमिगत करना न केवल तकनीकी रूप से जटिल है, बल्कि इससे प्रोजेक्ट की लागत भी दोगुने से ज्यादा बढ़ जाएगी।
मेट्रो अधिकारियों का कहना है कि एलिवेटेड मेट्रो के निर्माण पर प्रति किमी लगभग 150 करोड़ रुपये का खर्च आता है, जबकि अंडरग्राउंड ट्रैक बनाने पर यह राशि बढ़कर 350 करोड़ रुपये प्रति किमी तक पहुंच जाती है ।
सांसद आलोक शर्मा द्वारा उठाई गई अंडरग्राउंड की मांग पर असहमति जताते हुए मेट्रो प्रबंधन ने तर्क दिया है कि रूट बदलने पर लागत में भारी इजाफा होगा। 2018 में केंद्र से मंजूर डीपीआर के आधार पर अलाइनमेंट और टेंडर की शर्तें तय हो चुकी हैं। रूट बदलने के लिए मेट्रो बोर्ड, राज्य सरकार और फिर केंद्र से नई मंजूरी लेनी होगी, जिससे काम कई साल पिछड़ जाएगा।
वर्तमान में इस रूट पर एक साल से अधिक समय से काम चल रहा है और कई पिलर्स व स्ट्रक्चर तैयार हो चुके हैं। मेट्रो प्रबंधन का कहना है कि इस स्तर पर आकर डिजाइन बदलना व्यवहारिक नहीं है। प्रशासन जल्द ही इस मामले में अपना आधिकारिक पक्ष रखते हुए स्पष्ट करेगा कि भविष्य की ब्लू लाइन एलिवेटेड ही रहेगी ताकि तय समय सीमा में काम पूरा हो सके।
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23 जनवरी को हुई बैठक के दौरान सांसद ने कहा था कि भारत माता चौराहे से लिली टॉकीज, जहांगीराबाद तक मेट्रो को एलिवेटेड की बजाय अंडरग्राउंड किया जाना चाहिए। इस हिस्से में अब तक जो भी काम हुआ है, उसे तुरंत रोका जाए और पूरे प्रोजेक्ट की नए सिरे से प्लानिंग की जाए।
सांसद का कहना था कि यह इलाका शहर का अत्यंत व्यस्त और संवेदनशील क्षेत्र है, जहां मेट्रो का एलिवेटेड निर्माण यातायात, व्यापार और आम नागरिकों की आवाजाही को गंभीर रूप से प्रभावित करेगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनता की सुविधा और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अंडरग्राउंड मेट्रो पर गंभीरता से विचार किया जाए।