राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग को एक हुए लगभग दो वर्ष हो गए हैं, लेकिन अभी भी डॉक्टरों की प्रैक्टिस के नियम अलग-अलग हैं। इसको लेकर पूर्व के स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टरों में नाराजगी है। उनके लिए शर्तें कठिन हैं। वे अपने घर में उपचार संबंधी कोई लाइसेंसी उपकरण नहीं रख सकते।
उदाहरण के तौर पर डेंटिस्ट को बिना डेंटल चेयर के ही उपचार करना पड़ता है। वे निजी अस्पतालों में भी प्रैक्टिस नहीं कर सकते हैं, जबकि मेडिकल कॉलेजों के डॉक्टर यानी फैकल्टी डीन से अनुमति लेकर निजी अस्पतालों में प्रैक्टिस कर सकते हैं। यहां तक कि उन्हें सर्जरी करने की अनुमति भी है।
नियम में बदलाव की तैयारी
रीवा के शासकीय मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अस्पताल में बीते माह एक प्रसूता की मृत्यु के बाद सरकार अब डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर सख्ती करने जा रही है। साथ ही विभाग के अंतर्गत आने वाले सभी डॉक्टरों के लिए प्रैक्टिस के नियम एक जैसे किए जाएंगे। उन पर कसावट भी की जाएगी।
अभी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों पर नियम विरुद्ध प्रैक्टिस के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होती। उदाहरण के तौर पर वे भी सोनोग्राफी मशीन, डेंटल चेयर सहित कुछ चीजें अपने क्लीनिक में नहीं रख सकते हैं, पर इसका कहीं पालन नहीं हो रहा है।
घर में चल रहीं पैथालॉजी
पैथोलॉजी और माइक्रोबायोलॉजी विभाग के फैकल्टी अपने घरों में लैब संचालित कर रहे हैं। कई नर्सिंग होम्स में शासकीय मेडिकल कॉलेजों के डॉक्टरों के नाम प्रदर्शित किए गए हैं, पर संबंधित कॉलेज के डीन या ऊपर के अधिकारी नहीं देख रहे हैं।
नियम यह भी है कि निजी अस्पताल से मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर को जो आय होगी उसका 25 प्रतिशत कॉलेज में जमा कराना होगा, पर उसका पालन भी नहीं हो रहा है।
नए नियमों में यह हो सकता है प्रावधान
- सभी के प्रैक्टिस के नियम एक जैसे किए जाएंगे।
- जो डाक्टर नान प्रैक्टिसिंग अलाउंस (एनपीए) ले रहे हैं, उनकी प्रैक्टिस पर सख्ती से नजर रखी जाएगी।
- नर्सिंग होम में जाने पर रोक लगेगी।
- नान प्रैक्टिसिंग अलाउंस बढ़ाया जा सकता है।
- प्रशासनिक पद जैसे सीएमएचओ, सिविल सर्जन, डीन और अस्पताल अधीक्षक के प्रैक्टिस पर प्रतिबंध के लिए कड़ाई से अमल किया जाएगा।
- निगरानी के लिए एक समिति बनाई जा सकती है।
- सिर्फ अपने आवास पर प्रैक्टिस की छूट हो सकती है क्लीनिक खोलने की अनुमति नहीं रहेगी। अभी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर क्लीनिक भी संचालित कर रहे हैं।
प्रैक्टिस के नियम सभी के लिए एक जैसे होने चाहिए। स्वास्थ्य विभाग के नियम अच्छे हैं। इनका कड़ाई से पालन कराने की आवश्यकता है। प्रदेश में सोनोलॉजिस्ट की कमी को देखते हुए सोनोग्राफी की सुविधा डॉक्टर को घर में देने की छूट होनी चाहिए।- डॉ. पंकज शुक्ला, पूर्व डायरेक्टर, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम)