'निर्मला सप्रे की सदस्यता पर दो महीने में फैसला करें एमपी विधानसभा अध्यक्ष', सुप्रीम कोर्ट का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष को बीना विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता के मामले में दो महीने के भीतर नियमानुसार निर्णय लेने का निर्देश दिया है।
Publish Date: Wed, 04 Nov 2026 01:22:05 PM (IST)Updated Date: Wed, 04 Nov 2026 02:16:23 PM (IST)
बीना विधानसभा सीट से विधायक निर्मला सप्रे। फाइल फोटो।HighLights
- निर्मला सप्रे की सदस्यता पर दो महीने में फैसला
- कांग्रेस ने लगाया दल-बदल कानून के उल्लंघन का आरोप
- उमंग सिंघार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। मध्य प्रदेश के सागर जिले की बीना विधानसभा सीट से विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता और दल-बदल याचिका को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत ने मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष को निर्देश दिया है कि वे दो महीने के भीतर निर्मला सप्रे की सदस्यता के मामले में नियमानुसार फैसला लें। यह आदेश प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता उमंग सिंघार द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया गया है।
गौरतलब है कि निर्मला सप्रे ने वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर बीना सीट से जीत दर्ज की थी। हालांकि, चुनाव जीतने के कुछ समय बाद ही वे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गई थीं। इसके बाद कांग्रेस ने इसे दल-बदल कानून (दसवीं अनुसूची) का उल्लंघन बताते हुए उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की मांग की थी। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस संबंध में याचिका दायर की थी।
हाईकोर्ट के रुख पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने पैरवी की। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) से जुड़े मामलों का शीघ्र और समयबद्ध निराकरण किया जाना अत्यंत आवश्यक है। अदालत ने कहा कि भले ही हाईकोर्ट ने इस मामले में तात्कालिकता (अर्जेंसी) न मानी हो, लेकिन लोकतांत्रिक व्यवस्था में दल-बदल से जुड़े मामलों को लंबित नहीं रखा जा सकता।
सुनवाई हो चुकी है पूरी
निर्मला सप्रे की सदस्यता के मामले में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर सुनवाई की प्रक्रिया पूरी कर चुके हैं। उमंग सिंघार दोबारा सभी दस्तावेज भी प्रस्तुत कर चुके हैं। उधर, निर्मला सप्रे भी अपने पक्ष से अवगत करा चुकी हैं। उल्लेखनीय है कि सप्रे ने हाई कोर्ट में अपने जबाव में कहा था कि वह कांग्रेस में ही हैं।