
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों को बंद करने और शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त अव्यवस्थाओं के विरोध में रविवार को भोपाल के नीलम पार्क में बड़ा प्रदर्शन हुआ। स्कूल बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले आयोजित प्रदर्शन में प्रदेशभर से जेन जी, जेन अल्फा, शिक्षक और अभिभावक शामिल हुए। करीब चार घंटे चले प्रदर्शन में विद्यार्थियों ने सरकारी स्कूलों को बचाना है के नारे लगाए।
प्रदर्शनकारियों ने सरकारी स्कूलों के क्लोजर और मर्जर का विरोध करते हुए जर्जर भवनों की मरम्मत, पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की। उनका कहना था कि स्कूल बंद होने के बाद विद्यार्थियों को आठ से दस किलोमीटर तक की दूरी तय कर पढ़ाई के लिए जाना पड़ रहा है। इससे विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों और छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है।
समिति के डॉ. रामावतार शर्मा ने यूडाइस के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि देशभर में पिछले दस वर्षों में 94 हजार सरकारी स्कूल बंद हुए हैं। उनके अनुसार मध्य प्रदेश में करीब 30 हजार स्कूल बंद किए गए हैं। उन्होंने कहा कि स्कूलों के बंद होने और दूर स्थित सांदीपनि विद्यालयों के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और ड्रॉपआउट की संख्या बढ़ रही है। प्रदर्शन में टीईटी की अनिवार्यता हटाने और शिक्षकों की संख्या कम करने का भी विरोध किया गया।
समिति के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि सरकारी शिक्षण संस्थानों के बजट में लगातार कटौती के कारण कई स्कूल वर्षों से मरम्मत के इंतजार में हैं। बारिश के दौरान कई स्कूलों की छतों से पानी टपकता है, जबकि कुछ भवनों में सीलन और अन्य समस्याएं हैं। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से स्कूलों की स्थिति सुधारने और विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।
प्रदेश सरकार मर्जर के नाम पर सरकारी स्कूलों को बंद कर रही है। बजट में लगातार कटौती से कई स्कूलों की वर्षों से मरम्मत नहीं हुई है। बारिश में स्कूलों की छतों से पानी टपकता है और दीवारों में सीलन रहती है। सरकार को स्कूल बंद करने के बजाय उनकी व्यवस्थाएं सुधारनी चाहिए। - मुदित भटनागर, प्रदेश राज्य संयोजक, स्कूल बचाओ संघर्ष समिति
भोपाल जिले में 13 सरकारी स्कूलों को सांदीपनि विद्यालयों में मर्ज कर दिया गया है। इससे दो से तीन किलोमीटर क्षेत्र के स्कूल बंद हुए हैं और बच्चों को पढ़ाई के लिए दूर जाना पड़ रहा है। स्कूलों के मर्जर से विद्यार्थियों और अभिभावकों की परेशानी बढ़ी है। - सतीश ओझा, जेन जी
मैं गुना जिले के कुंभराज गांव के सरकारी स्कूल में पढ़ती हूं। हमारे स्कूल में विज्ञान विषय के शिक्षक नहीं हैं, जिसके कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही है। परीक्षा और भविष्य की तैयारी के लिए सभी विषयों के शिक्षकों का होना जरूरी है। सरकार को ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करनी चाहिए। - रानी लोधा, कक्षा 11वीं, गुना
मैं इंदौर के ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी स्कूल में पढ़ता हूं। हमारा स्कूल आठवीं कक्षा तक है। इसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए मुझे 10 से 15 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। ग्रामीण विद्यार्थियों के लिए इतनी दूरी तय करना मुश्किल होता है। सरकार को स्कूल बंद नहीं करना चाहिए। - कृष्णा सिसोदिया, जेन अल्फा, इंदौर
हर तरफ भ्रष्टाचार की शिकायतें सामने आ रही हैं और आए दिन पेपर लीक होने की खबरें आती हैं। विद्यार्थी मेहनत करके पढ़ाई कर रहे हैं और अभिभावक भी पैसा जुटाकर बच्चों की शिक्षा करा रहे हैं। परीक्षा व्यवस्था में अनियमितताओं से युवाओं का भविष्य प्रभावित होता है। सरकार को परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करनी चाहिए। - कृष्णा शर्मा, जेन जी, ग्वालियर
छोटे-छोटे गांवों के स्कूल बंद होने के बाद विद्यार्थियों को पढ़ने के लिए दूर स्थित स्कूलों में जाना पड़ रहा है। खासतौर पर छात्राओं के लिए दूर स्कूल जाना परेशानी का कारण बन सकता है। सरकार को स्कूल बंद करने के बजाय उनमें सुविधाएं बढ़ानी चाहिए और स्थानीय स्तर पर बेहतर शिक्षा उपलब्ध करानी चाहिए। - अंशुल अहिरवार, जेन जी, गुना
मैं भीमनगर शासकीय माध्यमिक स्कूल की छात्रा हूं। हमारे स्कूल को दूसरे स्कूल में मर्ज किया जा रहा है। इसके बाद हमें पढ़ाई के लिए दूर जाना पड़ेगा, जिससे विद्यार्थियों को परेशानी होगी। सरकार को विद्यार्थियों की परेशानी को समझना चाहिए और स्कूल को मर्ज नहीं करना चाहिए। - पिंकी विश्वकर्मा, जेन अल्फा, भोपाल