
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। विवाह सीजन अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है। 12 जुलाई तक ही विवाह के शुभ मुहूर्त हैं, जिसके बाद देवशयनी एकादशी से चातुर्मास शुरू हो जाएगा। चातुर्मास के दौरान मांगलिक कार्यों नहीं होते हैं। ऐसे में करीब चार महीने तक शादियां नहीं हो पाएंगी।
अब सीमित शुभ मुहूर्तों में विवाह कराने की होड़ मच गई है। शहर के करीब 95 प्रतिशत मैरिज गार्डन पहले ही बुक हो चुके हैं।
मानसून के कारण इस बार विवाह समारोहों में 'रैन-रेडी वेडिंग' का नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है। परिवार अब खुले लॉन की बजाय वाटरप्रूफ डोम, जर्मन हैंगर टेंट और इनडोर वेन्यू को ही चुन दे रहे हैं, जिससे बारिश समारोह में बाधा न बने।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 23 जुलाई को भोली नवमी का विशेष संयोग रहेगा, जिसे अनुभवी मुहूर्त जैसा माना जाता है। इसके बाद नियमित शुभ विवाह मुहूर्त 20 नवंबर से शुरू होकर 12 दिसंबर तक रहेंगे। यानी जुलाई से नवंबर के बीच विवाह के लिए कुल 22 शुभ मुहूर्त ही उपलब्ध हैं। सीमित तिथियों के कारण विवाह स्थलों की मांग काफी बढ़ गई है।
मैरिज गार्डन ऑनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रमण गोयनका के अनुसार शहर के लगभग 95 प्रतिशत मैरिज गार्डन बुक हो चुके हैं। इतना ही नहीं, नवंबर से शुरू होने वाले अगले विवाह सीजन के लिए भी कई मैरिज गार्डनों में 15 से 20 प्रतिशत तक अग्रिम बुकिंग हो चुकी है। होटल और रिसॉर्ट्स में भी लगातार बुकिंग बढ़ रही है।
इस बार मानसून को देखते हुए परिवार समारोह की योजना भी बदल रहे हैं। शहर के करीब 150 मैरिज गार्डनों में केवल 50 से 60 बड़े गार्डनों में ही पूर्ण वाटरप्रूफ डोम की सुविधा उपलब्ध है। बाकी स्थानों पर वाटरप्रूफ टेंट और रेन कवर का सहारा लिया जा रहा है। जर्मन हैंगर टेंट, लकड़ी के फ्लोर, पारदर्शी रेन कवर और इनडोर बैंक्वेट हॉल की मांग तेजी से बढ़ी है।
पंडितों के अनुसार शुभ मुहूर्त में विवाह करना नए दांपत्य जीवन के लिए सुख, समृद्धि और मंगल का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि सीमित तिथियों और बारिश की चुनौती के बावजूद परिवार पूरी तैयारी के साथ विवाह समारोह आयोजित कर रहे हैं, ताकि शुभ समय का लाभ मिल सके।