नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। प्रदेश सरकार विमुक्त, घुमक्कड़ और अर्ध-घुमक्कड़ जनजातियों के प्रति सामाजिक पूर्वाग्रह को बदलने के लिए अनूठा प्रयास कर रही है। मध्य प्रदेश जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी ने कुचबंदिया, पारधी, कालबेलिया, गाडुलिया लोहार और रबारी जनजातियों पर विशेष वृत्तचित्र (डाक्यूमेंट्री फिल्म) बनवाना शुरू किया है।
जन्मजात 'अपराधी' घोषित हैं समुदाय
बता दें, ब्रिटिश शासनकाल के दौरान वर्ष 1871 में आपराधिक जनजाति अधिनियम के तहत इन समुदायों को जन्मजात 'अपराधी' घोषित कर दिया गया था। स्वतंत्रता के बाद वर्ष 1952 में इस कानून को निरस्त कर इन्हें "विमुक्त" घोषित कर दिया गया।
कानूनी संरक्षण के बाद भी समाज, आम लोगों और यहां तक कि कानून-व्यवस्था संभालने वाली एजेंसियों के बीच इन्हें अकसर संदेह से ही देखा जाता है। इसी वजह से इस समुदाय का एक बड़ा हिस्सा अब भी समाज की मुख्यधारा से नहीं जुड़ पा रहा है।
कभी राज-समाज का भी उपयोगी हिस्सा रहे हैं ये समुदाय
कुचबंदियाः एक खानाबदोश और घुमंतू जनजातीय समुदाय है। प्राचीन काल से मल्ल युद्ध के पारंगत, रस्सी पर चढ़ने के विशेष कौशल की वजह से किलों की घेराबंदी में सेनाओं के काम आते थे। मराठा सेनाओं के लिए गोह को प्रशिक्षित करते रहे हैं।
पारधीः मध्य भारत में निवास करने वाली यह जनजाति लोग पशुओं और जड़ी- बूटियों के जानकार होते हैं। बेहतरीन शिकारी और भौगोलिक रास्तों की जानकारी की वजह से मध्यकालीन सेनाओं में इन्हें पागी और पोर्टर के रूप में काम मिला हुआ था।
कालबेलियाः नौ नाथों में से एक कनिप्पा नाथ के अनुयायी हैं। सांपों के विशेषज्ञ। उनको पकड़ने और जहर उतारने की औषधियों के ज्ञान की वजह से समाज में काफी सम्मान मिलता रहा है। इनकी बनाई कलात्मक कथरी आज भी पसंद की जाती है।
गाडुलिया लोहारः प्राचीन काल से सेनाओं को अस्त्र-शस्त्र बनाकर देते थे। बाद में कृषि उपकरण और दैनिक जीवन की आवश्यकता के लौह उपकरण का निर्माण और विक्रय करने लगे।
रबारीः इन्हें राइका, देवासी, देसाई, या पालका भी कहा जाता है। यह पशुपालक जनजाति है। भेड़, ऊंट, गधी के दूध और ऊन की आपूर्ति करते थे।
ये वृत्तचित्र इन जनजातियों के प्रति बनी भ्रामक धारणा पर चोट करेंगे। यह भी दिखाएंगे कि ये समुदाय कभी हमारे समाज के लिए कितने उपयोगी थे। इनका पारंपरिक हुनर भी इसके केंद्र में है। - धर्मेंद्र पारे, निदेशक, जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी