नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। सूरज नगर में रिटायर्ड आईएएस राकेश अग्रवाल की हत्या के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। करीब पांच हजार वर्गफीट में बने करोड़ों रुपये के आलीशान मकान में एक भी सीसीटीवी कैमरा नहीं था।
वहीं पूरी गली में भी कैमरे नहीं मिले। घर में दो पालतू श्वान होने के बावजूद सुरक्षा के लिहाज से कोई निगरानी व्यवस्था नहीं थी। वहीं, देखभाल के लिए रखे गए केयरटेकर भी लगातार बदल रहे थे।
10 सितंबर को एजेंसी से संपर्क करने के बाद 20 सितंबर तक दो केयरटेकर काम छोड़ चुके थे। देखभाल के लिए रखे गए तीसरे केयरटेकर वरुण कुमार ने ही उनकी हत्या कर दी।
रास्तों के कैमरों में दिखा आरोपित
हत्या के बाद जांच में रातीबड़ पुलिस को नीलबड़ और भदभदा क्षेत्र के सीसीटीवी फुटेज मिले हैं। इनमें आरोपित रात करीब 2:50 बजे आते-जाते दिखाई दिया। घर और गली में कैमरे नहीं होने के कारण पुलिस को आसपास की दुकानों और रास्तों पर लगे निजी कैमरों के फुटेज खंगालने पड़ रहे हैं।
अंतिम संस्कार के लिए बेटे का इंतजार
राकेश अग्रवाल का बेटा अमेरिका में रहता है। वह बुधवार को भारत के लिए रवाना हुआ और गुरुवार शाम तक भोपाल पहुंचने की संभावना है। बेटे के आने के बाद अंतिम संस्कार किया जाएगा। बुधवार को उनके साले और दिल्ली कैडर के पूर्व आईएएस नलिन सिंघल की अनुमति से हमीदिया अस्पताल में डॉक्टरों के पैनल ने पोस्टमार्टम किया।
मौत के बाद घर में अधिकारियों का जमावड़ा
हत्या की खबर के बाद दिनभर उनके घर पर प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों का पहुंचना जारी रहा। पूर्व मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस परिवार के साथ पहुंचे। इसके अलावा आइएएस राधेश्याम जुलानिया, रेरा के एमडी शैलेंद्र सिंह अरेरा, पूर्व डीजीपी मैथिलीशरण गुप्त और सेवानिवृत्त आइएएस मनोज श्रीवास्तव सहित कई अधिकारी पहुंचे।
शौकिया पेंटर थे, आखिरी वक्त तक हाथों में थे रंग
राकेश अग्रवाल को पेंटिंग का शौक था। वह लैंडस्केप और पोर्ट्रेट शैली में चित्र बनाते थे। वरिष्ठ चित्रकार अखिलेश वर्मा के अनुसार, उनकी कृतियां देश के विभिन्न शहरों में प्रदर्शित हो चुकी थीं। वह भोपाल में बड़ी चित्र प्रदर्शनी आयोजित करने की तैयारी कर रहे थे।
फिटनेस के प्रति भी उनकी खास रुचि थी और वह इंटरनेट मीडिया पर इससे जुड़ी तस्वीरें साझा करते थे। उनकी मृत्यु के बाद भी दाएं हाथ की अंगुलियों पर हरे और नीले रंग के निशान दिखाई दिए। हाथ में ब्रश और बिस्तर के पीछे लगी पेंटिंग उनके कला प्रेम की गवाही दे रही थी।
मौत के बाद पहुंचा टूथब्रश का पार्सल
बुधवार दोपहर करीब तीन बजे उनके घर एक पार्सल पहुंचा। डिलीवरी एजेंट के अनुसार, उसमें टूथब्रश था। राकेश अग्रवाल ने तीन दिन पहले इसे आनलाइन मंगवाया था, लेकिन सामान पहुंचने तक उनकी हत्या हो चुकी थी।
मोबाइल गुमने का बनाया बहाना
बागसेवनिया स्थित वर्मा होम हेल्थ केयर एजेंसी के संचालक अखिलेश वर्मा से भी रातीबड़ पुलिस ने पूछताछ की। उन्होंने बताया कि वरुण ने अगस्त 2026 में आनलाइन मिले नंबर के जरिए उनसे संपर्क किया था। वह पंजाब के पटियाला से भोपाल आया था।
उस समय उसने जिस नंबर से फोन किया था, उसे अपनी बहन का बताया था। उसने आधार कार्ड, पैन कार्ड और पुलिस वैरीफिकेशन के दस्तावेज भी भेजे थे।
हालांकि, वैरीफिकेशन मई 2025 का था, जिसकी वैधता छह महीने बाद ही समाप्त हो गई थी। संचालक ने बताया कि वरुण ने 13 से 15 अगस्त तक अशोकागार्डन क्षेत्र के पंजाबी बाग में एक परिवार के यहां केयरटेकर का काम किया था।
इसके बाद उसने एक अन्य परिवार के यहां भी एक दिन काम किया और फिर वापस चला गया। 25 सितंबर को उसने दोबारा संपर्क कर नौकरी मांगी।
इस बार उसने महाराष्ट्र के पुणे में मोबाइल गुम होने का बहाना बनाया और नए नंबर से बात की। इसके बाद एजेंसी ने उसे रिटायर्ड आईएएस राकेश अग्रवाल के घर 18 हजार रुपये महीने के वेतन पर केयरटेकर की नौकरी दिलाई।