'रेट बढ़ाकर की जा रही खरीदी, निष्पक्ष जांच हो'; MP में विधायक निधि और खरीदी में गड़बड़ी को लेकर उमंग सिंघार का सरकार पर हमला
सिंघार ने दावा किया कि एक नगरीय निकाय ने 60 लाख रुपये में 200 एलईडी बल्ब खरीदे। उन्होंने फिनाइल की खरीदी और जेम पोर्टल के माध्यम से होने वाली सरकारी खरीद में भी गड़बड़ी के आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
Publish Date: Sat, 24 Oct 2026 12:09:43 PM (IST)Updated Date: Sat, 24 Oct 2026 12:09:43 PM (IST)
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सीएम डॉ. मोहन यादव से पूरे मामले की जांच कराने के साथ रेड ऑफ शेड्यूल को कम कराने की मांग की। फाइल फोटो।HighLights
- विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ने भ्रष्टाचार का आरोप लगाया
- एलईडी बल्ब और फिनाइल की खरीदी पर उठाए सवाल
- मास्टर प्लान पर खुले मंच में चर्चा और घोटाले की जांच की मांग
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। नगरीय निकायों में होने वाली खरीदी में गड़बड़ी को विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे द्वारा स्वीकार करने पर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि भ्रष्टाचार केवल एक विभाग नहीं बल्कि हर स्तर पर है।
विधायक निधि के कामों में भी हमें अधिक राशि स्वीकृत करनी पड़ती है। अधिकारी रेट आफ शेडयूल बढ़ाकर खेल करते हैं। जो पानी का टैंकर बाजार में 60 से 70 हजार रुपये में मिलता है, उसके लिए ढाई लाख रुपये स्वीकृत करने पड़ते हैं।
एसीएस के खुलासे का दिया हवाला
उन्होंने भोपाल स्थित अपने आवास पर मीडिया से चर्चा में कहा कि विधानसभा में हम हर सत्र में भ्रष्टाचार के विषय उठाते हैं। अब इस पर नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव ने मुहर लगा दी है। सिंघार ने आरोप लगाया कि एक निकाय ने 60 लाख रुपये में 200 एलईडी बल्ब खरीदे। फिनाइल की खरीदी में भी गड़बड़ी है। जेम पोर्टल और सरकारी खरीदी में गड़बड़ी की बात कई बार सामने आ चुकी है।
खरीदी दर में गड़बड़ी का आरोप
विधायक निधि से होने वाले कामों की दरें बाजार में उपलब्ध सामग्री से कहीं अधिक है। नलकूप खनन बाजार से कराएं तो सवा-डेढ़ लाख रुपये में हो जाता है लेकिन विधायक निधि से करवाने के लिए ढाई लाख देने होते हैं। ऐसा ही अंतर अन्य सामग्रियों की दरों में भी है।
उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से पूरे मामले की जांच कराने के साथ रेड ऑफ शेड्यूल को कम कराने की मांग की। साथ ही निवेश के दावों को लेकर पूछा कि वास्तव में कितना निवेश जमीन पर उतरा और कितने युवाओं को रोजगार मिला।
मास्टर प्लान को लेकर खुले मंच पर हो चर्चा
उन्होंने शहरों के मास्टर प्लान को लेकर हो रहे विरोध पर कहा कि इसे आमजन की राय लेकर बनाया जाना चाहिए। किसानों, व्यापारियों और सिविल सोसाइटी को अपनी बात रखने के लिए पर्याप्त समय देने के साथ खुले मंच पर चर्चा कराई जाए।