लंदन से वापस आएगी वाग्देवी की प्रतिमा! मुख्यमंत्री ने कहा- केंद्र के साथ मिलकर कदम उठाएगी सरकार
ASI के संरक्षण एवं प्रबंधन में भोजशाला की गरिमा और अधिक सुदृढ़ होगी तथा श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना का अधिकार सुनिश्चित होगा। यह बात मुख्यमंत्री डॉ. मो ...और पढ़ें
Publish Date: Fri, 15 May 2026 10:20:09 PM (IST)Updated Date: Fri, 15 May 2026 10:20:09 PM (IST)
भोजशाला पर हाई कोर्ट का फैसला 'ऐतिहासिक'।HighLights
- भोजशाला पर हाई कोर्ट का फैसला 'ऐतिहासिक'
- हाई कोर्ट ने भोजशाला को माना 'आराधना स्थली'
- प्रतिमा वापसी के लिए सरकार प्रतिबद्ध- मुख्यमंत्री
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। धार की ऐतिहासिक भोजशाला को संरक्षित स्मारक एवं मां वाग्देवी की आराधना स्थली मानते हुए हाईकोर्ट द्वारा दिया गया निर्णय हमारी सांस्कृतिक विरासत, आस्था और इतिहास के सम्मान का महत्वपूर्ण क्षण है। एएसआइ के संरक्षण एवं प्रबंधन में भोजशाला की गरिमा और अधिक सुदृढ़ होगी तथा श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना का अधिकार सुनिश्चित होगा। यह बात मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने न्यायालय के निर्णय पर प्रतिक्रिया देते हुए कही।
वाग्देवी की प्रतिमा वापसी हेतु सरकार की प्रतिबद्धता
डॉ. यादव ने एक्स पर पोस्ट किया कि मां वाग्देवी की प्रतिमा को यूके से भारत वापस लाने के संबंध में केंद्र सरकार को विचार करने का निर्देश स्वागतयोग्य है। इस दिशा में राज्य सरकार भी प्रयास करेगी। हमारी संस्कृति सदैव ‘सर्वधर्म समभाव’, सामाजिक समरसता और भाईचारे की वाहक रही है। हम न्यायालय के निर्णय का पूर्ण सम्मान करते हैं और प्रदेश में सौहार्द, सांस्कृतिक गौरव एवं सामाजिक सद्भाव को और अधिक सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। निर्णय के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने में सरकार पूरा सहयोग देगी।
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वरिष्ठ मंत्रियों और नेताओं ने बताया ऐतिहासिक विजय
वरिष्ठ मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उच्च न्यायालय का भोजशाला की प्राचीन मंदिर के रूप में मान्यता स्वीकार करना, ऐतिहासिक निर्णय है। भारत सरकार के संस्थान पुरातत्व एवं सर्वेक्षण संस्थान की रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए यह निर्णय सुनाया है। इससे वाग्देवी की मूर्ति की स्थापना का मार्ग प्रशस्त होगा।
राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया ने कहा कि यह निर्णय राष्ट्रीय और सनातन अस्मिता की एक और बड़ी विजय है। आज भावुक हूं, क्योंकि 90 के दशक में इस मुक्ति आंदोलन में जेल व मुकदमों की यातनाएं झेलीं। अयोध्या की तरह एक और सत्य की जीत हुई।