नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। क्या आपके मोहल्ले, गांव या खेत के पास कोई ऐसा बरगद, पीपल, नीम, आम, खजूर या चिरौंजी का पेड़ है, जो दशकों से खड़ा है और स्थानीय लोगों की यादों का हिस्सा बन चुका है? यदि हां, तो अब आप उसकी कहानी दुनिया के सामने ला सकते हैं।
डबल्यूडबल्यूएफ-इंडिया ने मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में ‘हेरिटेज ट्री हंट प्रतियोगिता’ शुरू की है, जिसके माध्यम से लोगों को अपने आसपास मौजूद ऐतिहासिक और प्राकृतिक महत्व वाले वृक्षों की खोज, पहचान और दस्तावेजीकरण करने का अवसर मिलेगा।
इस अनूठी प्रतियोगिता का उद्देश्य केवल पुराने पेड़ों को चिह्नित करना नहीं, बल्कि उनसे जुड़ी कहानियों, लोक परंपराओं, सांस्कृतिक महत्व और पर्यावरणीय योगदान को भी संरक्षित करना है। प्रतियोगिता के जरिए नागरिक वैज्ञानिक की भूमिका निभाते हुए प्रदेश की प्राकृतिक धरोहरों को पहचानने और उनके संरक्षण में योगदान दे सकेंगे।
क्या है हेरिटेज ट्री?
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के अनुसार ऐसे वृक्ष, जिनकी आयु 50 वर्ष या उससे अधिक हो, या जिनके तने का घेरा निर्धारित मानक (40 सेमी) से बड़ा हो, उन्हें हेरिटेज ट्री की श्रेणी में रखा जा सकता है। ऐसे पेड़ केवल हरियाली का हिस्सा नहीं होते, बल्कि किसी क्षेत्र के इतिहास, संस्कृति और सामाजिक जीवन के भी साक्षी होते हैं।
ऐसे बनें ‘ट्री डिटेक्टिव’
प्रतिभागियों को किसी संभावित हेरिटेज वृक्ष की पहचान कर उसकी तीन जियो-टैग्ड तस्वीरें जमा करनी होंगी। इसके साथ वृक्ष की प्रजाति, स्थान, अनुमानित आयु, तने का घेरा और उससे जुड़ी विशेष जानकारियां भी देनी होंगी। प्रतियोगियों को स्थानीय बुजुर्गों, ग्रामीणों और क्षेत्र के निवासियों से बातचीत कर पेड़ से जुड़ी कहानियां, ऐतिहासिक घटनाएं, धार्मिक मान्यताएं, लोककथाएं और सामाजिक महत्व भी एकत्र करना होगा।
इन जानकारियों के आधार पर उस वृक्ष का विस्तृत दस्तावेज तैयार किया जाएगा।
महत्वपूर्ण तिथियां
- पंजीकरण की अंतिम तिथि: 30 जून 2026
- प्रतियोगिता अवधि: 1 जुलाई से 22 जुलाई 2026
- भागीदारी शुल्क: निःशुल्क
- पात्रता: 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी नागरिक