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नईदुनिया प्रतिनिधि, छतरपुर। मध्य प्रदेश के छतरपुर में आजादी के पर्व पर हाई स्कूल तक के बच्चों ने अपने गांव की बुनियादी सुविधाओं के लिए आवाज बुलंद की। महाराजपुर क्षेत्र के टटम गांव के स्कूली बच्चों ने सड़क, पुल और बिजली की मांग को लेकर करीब 40 किलोमीटर की पदयात्रा की। उनके साथ ग्रामीण भी मौजूद रहे। बारिश के बीच करीब 18 घंटे तक सत्याग्रह जारी रहा।
शनिवार शाम करीब 7 बजे बच्चे और कुछ ग्रामीण महाराजपुर तहसील पहुंचे। अधिकारियों से बातचीत के बाद जब उन्हें संतोषजनक आश्वासन नहीं मिला तो उन्होंने छतरपुर की ओर पैदल मार्च शुरू कर दिया।
महाराजपुर थाना क्षेत्र की सीमा के पास प्रदर्शनकारियों को विधायक कामाख्या प्रताप सिंह के मिलने की सूचना मिली। इसके बाद बच्चे और ग्रामीण एक पेट्रोल पंप पर रुक गए। विधायक के तत्काल मौके पर नहीं पहुंचने पर बच्चों ने उनके खिलाफ नारे भी लगाए।
तेज बारिश के बावजूद प्रदर्शनकारी करीब तीन-चार घंटे तक विधायक का इंतजार करते रहे। इस दौरान बच्चे और ग्रामीण बारिश में भीगते रहे। रात करीब 11 बजे उन्हें विधायक के आलीपुरा स्थित घर बुलाए जाने की जानकारी मिली। बच्चों ने निजी आवास पर जाने से इन्कार कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि बातचीत किसी सार्वजनिक स्थान पर होनी चाहिए। इसके बाद प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों के लिए वाहनों की व्यवस्था की।
रात करीब 11:30 बजे पांच-छह बच्चियों और ग्रामीणों के प्रतिनिधिमंडल को अधिकारियों के साथ नौगांव सर्किट हाउस भेजा गया। यहां रात करीब 1:30 बजे विधायक कामाख्या प्रताप सिंह के साथ प्रदर्शनकारियों की बातचीत हुई।
बच्चों और ग्रामीणों की प्रमुख मांगों में मढ़ापुरवा से टटम तक सड़क, पुल और टटम के वार्ड नंबर 20 में बिजली सुविधा शामिल है। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि गांव में इन बुनियादी सुविधाओं की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है।
विधायक ने बातचीत के दौरान दो-तीन दिनों के भीतर टेंडर करा देने का आश्वासन दिया। इसके बाद दिन में शुरू हुआ सत्याग्रह रात करीब डेढ़ बजे समाप्त कर दिया गया। आंदोलन खत्म होने के बाद बच्चे और ग्रामीण गांव के लिए रवाना हुए और रविवार तड़के करीब 2:30 बजे टटम लौटे।
सुबह से पैदल चलने के बाद बच्चे और ग्रामीण शनिवार शाम करीब 7 बजे महाराजपुर तहसील पहुंचे। अधिकारियों से चर्चा के बाद भी संतोषजनक आश्वासन नहीं मिलने पर उन्होंने छतरपुर की ओर कूच करने का निर्णय लिया। महाराजपुर थाना क्षेत्र की सीमा के पास एक निजी पेट्रोल पंप पर उन्हें विधायक के आने की सूचना मिली।
विधायक के मौके पर नहीं पहुंचने पर आंदोलनकारियों और स्कूली बच्चों ने भाजपा विधायक कामाख्या प्रताप सिंह उर्फ टीकाराजा मुर्दाबाद के नारे भी लगाए। इसके वीडियो भी सामने आए हैं।
तेज बारिश के बीच बच्चे और ग्रामीण करीब 3-4 घंटे तक विधायक का इंतजार करते रहे। रात करीब 11 बजे तक विधायक के नहीं पहुंचने पर उन्हें आलीपुरा स्थित विधायक के घर बुलाए जाने की सूचना दी गई। ग्रामीणों और बच्चों ने निजी घर पर जाने से इनकार करते हुए सार्वजनिक स्थान पर बातचीत की मांग की। इसके बाद नौगांव सर्किट हाउस में बैठक तय हुई।
रात करीब 11.30 बजे प्रशासन ने वाहनों की व्यवस्था की। 5-6 बच्चियां और गांव के 5-6 प्रतिनिधि एसडीएम, एसडीओपी और सीओ के साथ नौगांव रवाना हुए।
रात करीब 1.30 बजे सर्किट हाउस में विधायक कामाख्या प्रताप सिंह के साथ ग्रामीणों की बातचीत हुई। करीब 18 घंटे चले आंदोलन के बाद विधायक ने तीनों मांगों पर निर्माण कार्य शुरू कराने का आश्वासन दिया। ग्रामीण प्रतिनिधि सूरज अहिरवार ने बताया कि विधायक ने 3-4 दिन में टेंडर प्रक्रिया शुरू कराने और इसके बाद निर्माण कार्य की दिशा में कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
यह घटनाक्रम जनप्रतिनिधि और जनता के बीच संवाद तथा जवाबदेही पर सवाल खड़े करता है। जनप्रतिनिधि का दायित्व जनता के बीच पहुंचकर उसकी समस्याएं सुनना और समाधान के लिए प्रयास करना है। ऐसे में सवाल यह है कि सड़क, पुल और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए बच्चों और ग्रामीणों को 40 किलोमीटर पैदल चलकर अपनी आवाज क्यों उठानी पड़ी? अब ग्रामीणों की नजर विधायक के आश्वासन पर है कि तीन-चार दिन में टेंडर की प्रक्रिया वास्तव में शुरू होती है या नहीं।