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छतरपुर में किताबों की उम्र में सड़क-पुल के लिए जंग, 18 घंटे बारिश में 40 किमी पैदल चले बच्चे; विधायक के आश्वासन पर खत्म हुआ आंदोलन

Chhatarpur news: आंदोलन के दौरान बच्चे और ग्रामीण बारिश में भीगते हुए महाराजपुर से गढ़ीमलहरा के बीच तक पहुंचे। उनका कहना था कि जब तक मांगों पर ठोस कार...और पढ़ें

By Balram SoniEdited By: Rajdil Shivhare
Publish Date: Sun, 16 Aug 2026 02:16:31 PM (IST)Updated Date: Sun, 16 Aug 2026 02:17:18 PM (IST)
छतरपुर में किताबों की उम्र में सड़क-पुल के लिए जंग, 18 घंटे बारिश में 40 किमी पैदल चले बच्चे; विधायक के आश्वासन पर खत्म हुआ आंदोलन
सड़क, पुल और बिजली की मांगों को लेकर आंदोलन करते स्कूली छात्राएं। नईदुनिया

HighLights

  1. आजादी के दिन शुरू हुआ आंदोलन, 18 घंटे तक बारिश में चलते रहे बच्चे और ग्रामीण
  2. महाराजपुर तहसील में नहीं मिला संतोषजनक आश्वासन, छतरपुर की ओर कूच किया
  3. विधायक के इंतजार में रात 11 बजे तक पेट्रोल पंप पर डटे रहे प्रदर्शनकारी

नईदुनिया प्रतिनिधि, छतरपुर। आजादी के पर्व पर छतरपुर के महाराजपुर क्षेत्र के टटम गांव के स्कूली बच्चों ने वह तस्वीर सामने रखी, जो ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं की हकीकत पर सवाल खड़े करती है। सड़क, पुल और बिजली की मांग को लेकर बच्चे और ग्रामीण करीब 40 किलोमीटर पैदल चले। करीब 18 घंटे तक चला यह आंदोलन रात 1:30 बजे नौगांव सर्किट हाउस में विधायक कामाख्या प्रताप सिंह से बातचीत और तीन-चार दिन में टेंडर प्रक्रिया शुरू कराने के आश्वासन के बाद खत्म हुआ। रविवार तड़के करीब 2:30 बजे बच्चे और ग्रामीण गांव लौटे।

ग्रामीणों की प्रमुख मांगों में मढ़ापुरवा से टटम तक सड़क, टपरन पुरवा से टटम तक पुल और टटम के वार्ड नंबर 20 में बिजली सुविधा शामिल है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क और पुल नहीं होने से बारिश के दिनों में गांव का संपर्क बेहद मुश्किल हो जाता है। बच्चों को स्कूल जाने के लिए खराब रास्तों और नालों से होकर गुजरना पड़ता है।


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संतोषजनकर आश्वासन नहीं मिलने पर छात्राओं ने छतरपुर की ओर पैदल कूच कर दिया। नईदुनिया

तहसील से शुरू हुआ सफर, रात तक चलता रहा इंतजार

शनिवार शाम करीब सात बजे बच्चे और ग्रामीण महाराजपुर तहसील पहुंचे। अधिकारियों से चर्चा के बाद संतोषजनक आश्वासन नहीं मिलने पर उन्होंने छतरपुर की ओर पैदल बढ़ना शुरू कर दिया। महाराजपुर थाना क्षेत्र की सीमा के पास उन्हें विधायक के मिलने की सूचना मिली। प्रदर्शनकारी एक पेट्रोल पंप पर रुक गए। विधायक के तत्काल नहीं पहुंचने पर कुछ ग्रामीणों और बच्चों ने उनके खिलाफ नारे भी लगाए। तेज बारिश के बीच प्रदर्शनकारी तीन-चार घंटे तक विधायक का इंतजार करते रहे। रात करीब 11 बजे उन्हें विधायक के आलीपुरा स्थित घर बुलाए जाने की सूचना मिली, लेकिन ग्रामीणों ने निजी घर पर जाने से इनकार कर दिया। उन्होंने सार्वजनिक स्थान पर बातचीत की मांग रखी।

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सरकारी वाहनों से बच्चियों को सर्किट हाउस भेजा गया। नईदुनिया

रात 1:30 बजे हुई बातचीत

इसके बाद प्रशासन ने वाहनों की व्यवस्था की और रात करीब 11:30 बजे पांच-छह बच्चियों तथा ग्रामीणों के प्रतिनिधिमंडल को अधिकारियों के साथ नौगांव सर्किट हाउस भेजा गया। यहां रात करीब 1:30 बजे विधायक कामाख्या प्रताप सिंह के साथ बातचीत हुई। ग्रामीण प्रतिनिधि सूरज अहिरवार के अनुसार, विधायक ने तीनों मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन देते हुए तीन-चार दिन में टेंडर प्रक्रिया शुरू कराने की बात कही। इसके बाद आंदोलन समाप्त कर दिया गया।

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बारिश में भीगते रहे, लेकिन पीछे नहीं हटे

आंदोलन के दौरान बच्चे और ग्रामीण बारिश में भीगते हुए महाराजपुर से गढ़ीमलहरा के बीच तक पहुंचे। उनका कहना था कि जब तक मांगों पर ठोस कार्रवाई का भरोसा नहीं मिलेगा, वे वापस नहीं लौटेंगे। सबसे मार्मिक तस्वीर यह रही कि जिन हाथों में किताबें होनी चाहिए थीं, उनमें सड़क, पुल और बिजली की मांगों के सवाल थे। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से समस्याएं बताने के बावजूद समाधान नहीं हुआ, इसलिए बच्चों को लेकर पैदल निकलने की नौबत आई।

अब आश्वासन की अग्निपरीक्षा

आंदोलन तो खत्म हो गया, लेकिन असली सवाल अब शुरू हुआ है। ग्रामीणों को तीन-चार दिन में टेंडर प्रक्रिया शुरू होने का आश्वासन मिला है। अब देखना यह है कि यह आश्वासन कागज से जमीन तक कब पहुंचता है और वर्षों से सड़क, पुल व बिजली का इंतजार कर रहे टटम गांव के लोगों को वास्तव में सुविधा कब मिलती है।