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ASI के म्यूजियम में 100 साल से पड़ा था 'भगवान विष्णु का सिर', अब खजुराहो के जावरी मंदिर में 500 साल बाद प्रतिमा से जुड़ेगा धड़

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) को 11वीं सदी की इस सात फीट ऊंची मूर्ति का लापता सिर अपने ही एक संग्रहालय के भंडार में मिल गया है। विशेषज्ञों की टीम सिर की जांच कर रही है।

By Digital DeskEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Wed, 14 Oct 2026 10:40:28 PM (IST)Updated Date: Wed, 14 Oct 2026 10:54:23 PM (IST)
ASI के म्यूजियम में 100 साल से पड़ा था 'भगवान विष्णु का सिर', अब खजुराहो के जावरी मंदिर में 500 साल बाद प्रतिमा से जुड़ेगा धड़
खजुराहो के जावरी मंदिर में 500 साल बाद प्रतिमा से जुड़ेगा धड़

HighLights

  1. ASI के अपने संग्रहालय के भंडार से मिला मूर्ति का गायब सिर
  2. तकनीकी अध्ययन के बाद सिर को प्रतिमा के धड़ से जोड़ा जाएगा
  3. 11वीं सदी के चंदेलकालीन जावरी मंदिर में स्थापित है यह मूर्ति

डिजिटल डेस्क। खजुराहो के जावरी मंदिर में भगवान विष्णु की सिर विहीन मूर्ति को देखकर श्रद्धालु सदियों से जिस पीड़ा का अनुभव करते आ रहे हैं, अब वह दूर होने की उम्मीद जगी है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) को 11वीं सदी की इस सात फीट ऊंची मूर्ति का लापता सिर अपने ही एक संग्रहालय के भंडार में मिल गया है। विशेषज्ञों की टीम सिर की जांच कर रही है। तकनीकी अध्ययन और आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद इसे दोबारा प्रतिमा के धड़ से जोड़ने की तैयारी है।

1910 से एएसआइ के संग्रहालय में ही मौजूद था मूर्ति का सिर

एएसआइ के महानिदेशक डॉ यदुबीर सिंह रावत ने बताया कि विभाग के भंडार में मूर्ति का सिर मिला है। मूर्ति से सिर कैसे अलग हुआ इसके एएसआइ के पास प्रमाण मौजूद नहीं हैं। खजुराहो के जिस संग्रहालय में सिर मिला है, इसकी स्थापना 1910 में ब्रिटिश अधिकारी डब्ल्यू. ए. जार्डिन द्वारा की गई थी। उन्होंने खजुराहो के मंदिरों के आसपास बिखरी हुई मूर्तियों को सहेजने के लिए इसे मातंगेश्वर मंदिर के पास एक खुले परिसर में स्थापित किया था, तब इसे जार्डिन म्यूजियम कहा जाता था।


1952 में यह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के नियंत्रण में आया और उस समय इसका नाम बदल कर पुरातत्व संग्रहालय किया गया। एएसआइ के एक अधिकारी ने कहा कि संग्रहालय में मौजूद सिर भगवान विष्णु की मूर्ति का सिर है, इसके बारे में किसी को जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि सिर 1910 में स्थापना के समय से ही संग्रहालय में मौजूद था।

सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था मामला, खारिज हो गई थी याचिका

खजुराहो के जावरी मंदिर में बिना सिर वाली विष्णु मूर्ति को लेकर विवाद पिछले साल सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था जब हरियाणा के वकील राकेश दलाल ने इसके पुनरुद्धार, प्रतिस्थापन या सात फुट की मूर्ति के पुनर्निर्माण की मांग की थी। याचिका में दावा किया गया था कि मुगल आक्रमणों के दौरान प्रतिमा को क्षतिग्रस्त किया गया था।

जब यह याचिका लंबित थी, तब तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई ने कहा था, "जाओ और खुद देवता से कहो कि वे अब कुछ करें।" तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिका खारिज कर दी थी। हालांकि गवई ने बाद में स्पष्ट किया था कि वे सभी धर्मों का सम्मान करते हैं, लेकिन इस मामले के बाद एक वकील ने अदालत कक्ष के भीतर ही उन पर जूता फेंकने की कोशिश की थी।

चंदेल शासकों के काल का है यह ऐतिहासिक मंदिर

खजुराहो के पूर्वी मंदिर समूह में स्थित जावरी मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। इसका निर्माण चंदेल शासकों के शासनकाल में 11वीं सदी के उत्तरार्ध में हुआ माना जाता है। मंदिर की ऐतिहासिक और स्थापत्य महत्ता के कारण यह खजुराहो के विश्व धरोहर स्मारक समूह का हिस्सा है। अब मूर्ति का सिर मिलने से उसके मूल स्वरूप के स्थापित करने की उम्मीद बढ़ गई है।

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