

नईदुनिया प्रतिनिधि, दमोह। शासकीय एवं शासकीय कार्यालय में लगने वाले आउटसोर्स के माध्यम से कर्मचारियों को नौकरी दिलाने के नाम पर झांसा देकर युवाओं से लाखों रुपए ठगने वाले गिरोह के मास्टरमाइंड शैलेंद्र वर्मा को पुलिस ने गिरफ्तार किया।
आरोपित को न्यायालय में पेश किया गया। वहां से उसे रिमांड पर लिया गया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपित ने दमोह, पन्ना, सागर सहित अन्य जिलों के करीब 15 युवाओं से लगभग 40 लाख की ठगी की।
पुलिस के अनुसार ठगी की रकम का बड़ा हिस्सा गुना निवासी विवेक राय और मंदसौर निवासी ओमप्रकाश शुक्ला के खातों में ट्रांसफर कराया गया। जांच में यह भी पता चला कि शैलेंद्र वर्मा मोटी रकम लेने के बाद फर्जी नियुक्ति पत्र जारी करता था, कुछ समय बाद ई-मेल भेजकर नियुक्ति निरस्त होने की सूचना दे दे देता था।
इसके बाद नई भर्ती में नौकरी लगवाने का आश्वासन देकर पीड़ितों को नालंबे समय तक टालता रहता था। हैरानी की बात यह है कि आवेदकों की फर्जी अंकसूचियां उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर से बनवाई जाती थीं।
आवेदक नियुक्ति के छह माह तक नौकरी कर पाते थे, सत्यापन में फर्जी अंकसूची मिलने रवि को बाहर कर दिया जाता था।
जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर बोर्ड की फर्जी 10वीं की अंकसूचियां तैयार कराता था। इनमें 94 से 95 प्रतिशत अंक दर्शाए जाते थे ताकि ग्रामीण डाक सेवक भर्ती में चयन हो सके।
छह माह बाद दस्तावेज सत्यापन में फर्जीवाड़ा सामने आने पर अभ्यर्थियों की नौकरी समाप्त हो जाती थी। ऐसे मामले सागर जिले में भी दर्ज है, पुलिस के अनुसार इस पूरे नेटवर्क में ओमप्रकाश शुक्ला की महत्वपूर्ण भूमिका सामने आई है।
पीड़ित देवेंद्र अहिरवार ने बताया कि अगस्त 2025 में सागर निवासी ओकेश और शैलेंद्र वर्मा भोपाल गए थे। एक माल में शैलेंद्र ने ओकेश की मुलाकात विवेक राय से कराई।
ओकेश अहिरवार से नौकरी दिलाने के नाम पर 4.36 लाख लिए गए। बाद में 2.75 लाख का चेक लौटाया गया लेकिन बैंक में प्रस्तुत करने पर वह बाउंस हो गया, इस मामले में विवेक राय के खिलाफ भी प्रकरण दर्ज है।
धरमपुरा निवासी कैलाश अहिरवार से पंचायत, कृषि विभाग और न्यायालय में नौकरी दिलाने के नाम पर करीब 18 लाख विभित्र खातों में जमा कराए गए लेकिन नियुक्ति नहीं मिली।
राशि वसूली गई उनमें हरिनारायण अहिरवार सात लाख आउटसोर्स संविदा नौकरी, गोपाल कृष्ण अहिरवार 50 हजार उद्यानिकी विभाग, सुरेंद्र अहिरवार 45 हजार बैंक नौकरी, लाखन लोधी एक लाख संविदा वर्ग-2, भोले सिंह लोधी 50 हजार, सुनीता लोधी 50 हजार सुपरवाइजर, अजय जाटव 50 हजार एमपी पुलिस, सपना जाटव एक लाख सुपरवाइजर, दिलीप अहिरवार 25 हजार बैंक नौकरी, सीमा अहिरवार 30 हजार स्वास्थ्य विभाग, डालचंद्र अहिरवार 40 हजार शिक्षा विभाग आपरेटर शामिल है। इसमें 20 हजार वापस किए गए, 20 हजार अभी भी बकाया है।
पुलिस के अनुसार इनमें से कुछ पीड़ितों को कुल 2.70 लाख वापस किए गए, अधिकांश रकम अब भी फंसी हुई है। पुलिस जांच में सामने आया कि पन्ना जिले में भी विवेक राय के खिलाफ तीन प्रकरण दर्ज है।
लक्ष्मीकांत शर्मा से 35 लाख और रोतेश गुप्ता से 10 लाख की धोखाधड़ी का मामला दर्ज है। दोनों को दिए गए चेक भी बाउंस हो गए थे, विवेक राय पहले भी चेक बाउंस के मामले में गिरफ्तार हो चुका है।
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