• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
naidunia animated logo
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • कोरोना वायरस
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • स्‍वतंत्रता दिवस
  • सावन माह
  • मानसून
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • राशि परिवर्तन
  • वास्‍तु शास्‍त्र
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • दमोह

फर्जी नौकरी का झांसा देकर 15 युवाओं से 40 लाख ठगे, मास्टरमाइंड शैलेंद्र वर्मा गिरफ्तार

जांच में यह भी पता चला कि शैलेंद्र वर्मा सरकारी विभागों और आउटसोर्स भर्तियों के नाम पर बेरोजगार युवाओं को नौकरी का भरोसा देता था।

By Sunil GautamEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Wed, 29 Jul 2026 01:47:55 PM (IST)Updated Date: Wed, 29 Jul 2026 01:47:55 PM (IST)
फर्जी नौकरी का झांसा देकर 15 युवाओं से 40 लाख ठगे, मास्टरमाइंड शैलेंद्र वर्मा गिरफ्तार
पूरे नेटवर्क में ओमप्रकाश शुक्ला की महत्वपूर्ण भूमिका सामने आई है। प्रतीकात्‍मक चित्र

HighLights

  1. न्यायालय में पेश करके रिमांड पर लिया गया है
  2. मोटी रकम लेने के बाद फर्जी नियुक्ति पत्र जारी करता था
  3. ई-मेल भेजकर नियुक्ति निरस्त होने की सूचना दे देता था।

नईदुनिया प्रतिनिधि, दमोह। शासकीय एवं शासकीय कार्यालय में लगने वाले आउटसोर्स के माध्यम से कर्मचारियों को नौकरी दिलाने के नाम पर झांसा देकर युवाओं से लाखों रुपए ठगने वाले गिरोह के मास्टरमाइंड शैलेंद्र वर्मा को पुलिस ने गिरफ्तार किया।

दमोह, पन्ना, सागर सहित अन्य जिलों के युवा बने शिकार

आरोपित को न्यायालय में पेश किया गया। वहां से उसे रिमांड पर लिया गया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपित ने दमोह, पन्ना, सागर सहित अन्य जिलों के करीब 15 युवाओं से लगभग 40 लाख की ठगी की।

कुछ समय बाद ई-मेल भेजकर नियुक्ति निरस्त कर देता था

पुलिस के अनुसार ठगी की रकम का बड़ा हिस्सा गुना निवासी विवेक राय और मंदसौर निवासी ओमप्रकाश शुक्ला के खातों में ट्रांसफर कराया गया। जांच में यह भी पता चला कि शैलेंद्र वर्मा मोटी रकम लेने के बाद फर्जी नियुक्ति पत्र जारी करता था, कुछ समय बाद ई-मेल भेजकर नियुक्ति निरस्त होने की सूचना दे दे देता था।


फर्जी अंकसूचियां उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर से बनवाई जाती थीं

इसके बाद नई भर्ती में नौकरी लगवाने का आश्वासन देकर पीड़ितों को नालंबे समय तक टालता रहता था। हैरानी की बात यह है कि आवेदकों की फर्जी अंकसूचियां उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर से बनवाई जाती थीं।

फर्जी अंकसूची मिलने बाहर कर दिया जाता था

आवेदक नियुक्ति के छह माह तक नौकरी कर पाते थे, सत्यापन में फर्जी अंकसूची मिलने रवि को बाहर कर दिया जाता था।

फर्जी अंकसूची बनाकर दिलाते थे नौकरी

जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर बोर्ड की फर्जी 10वीं की अंकसूचियां तैयार कराता था। इनमें 94 से 95 प्रतिशत अंक दर्शाए जाते थे ताकि ग्रामीण डाक सेवक भर्ती में चयन हो सके।

फर्जीवाड़ा सामने आने पर नौकरी समाप्त हो जाती थी

छह माह बाद दस्तावेज सत्यापन में फर्जीवाड़ा सामने आने पर अभ्यर्थियों की नौकरी समाप्त हो जाती थी। ऐसे मामले सागर जिले में भी दर्ज है, पुलिस के अनुसार इस पूरे नेटवर्क में ओमप्रकाश शुक्ला की महत्वपूर्ण भूमिका सामने आई है।

भोपाल में कराई थी मुलाकात

पीड़ित देवेंद्र अहिरवार ने बताया कि अगस्त 2025 में सागर निवासी ओकेश और शैलेंद्र वर्मा भोपाल गए थे। एक माल में शैलेंद्र ने ओकेश की मुलाकात विवेक राय से कराई।

बैंक में प्रस्तुत करने पर वह बाउंस हो गया

ओकेश अहिरवार से नौकरी दिलाने के नाम पर 4.36 लाख लिए गए। बाद में 2.75 लाख का चेक लौटाया गया लेकिन बैंक में प्रस्तुत करने पर वह बाउंस हो गया, इस मामले में विवेक राय के खिलाफ भी प्रकरण दर्ज है।

कैलाश से 18 लाख, अन्य युवाओं से भी वसूली

धरमपुरा निवासी कैलाश अहिरवार से पंचायत, कृषि विभाग और न्यायालय में नौकरी दिलाने के नाम पर करीब 18 लाख विभित्र खातों में जमा कराए गए लेकिन नियुक्ति नहीं मिली।

20 हजार वापस किए गए, 20 हजार अभी भी बकाया

राशि वसूली गई उनमें हरिनारायण अहिरवार सात लाख आउटसोर्स संविदा नौकरी, गोपाल कृष्ण अहिरवार 50 हजार उद्यानिकी विभाग, सुरेंद्र अहिरवार 45 हजार बैंक नौकरी, लाखन लोधी एक लाख संविदा वर्ग-2, भोले सिंह लोधी 50 हजार, सुनीता लोधी 50 हजार सुपरवाइजर, अजय जाटव 50 हजार एमपी पुलिस, सपना जाटव एक लाख सुपरवाइजर, दिलीप अहिरवार 25 हजार बैंक नौकरी, सीमा अहिरवार 30 हजार स्वास्थ्य विभाग, डालचंद्र अहिरवार 40 हजार शिक्षा विभाग आपरेटर शामिल है। इसमें 20 हजार वापस किए गए, 20 हजार अभी भी बकाया है।

अधिकांश रकम अब भी फंसी हुई है

पुलिस के अनुसार इनमें से कुछ पीड़ितों को कुल 2.70 लाख वापस किए गए, अधिकांश रकम अब भी फंसी हुई है। पुलिस जांच में सामने आया कि पन्ना जिले में भी विवेक राय के खिलाफ तीन प्रकरण दर्ज है।

विवेक राय चेक बाउंस के मामले में गिरफ्तार हो चुका है

लक्ष्मीकांत शर्मा से 35 लाख और रोतेश गुप्ता से 10 लाख की धोखाधड़ी का मामला दर्ज है। दोनों को दिए गए चेक भी बाउंस हो गए थे, विवेक राय पहले भी चेक बाउंस के मामले में गिरफ्तार हो चुका है।

यह भी पढ़ें- 18 लाख की कथित धोखाधड़ी में एफआईआर निरस्त करने से हाई कोर्ट का इनकार