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दमोह में मिशन अस्पताल: फर्जी डाक्टर को भर्ती कराने वाला सरकारी स्कूल का कर्मचारी गिरफ्तार

जांच के दौरान यह भी सामने सामने आया कि मिशन अस्पताल की कैथ लैब के पंजीयन में भी अनियमितताएं हुई थीं।

By Sunil GautamEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Wed, 24 Jun 2026 01:37:57 PM (IST)Updated Date: Wed, 24 Jun 2026 01:37:57 PM (IST)
दमोह में मिशन अस्पताल: फर्जी डाक्टर को भर्ती कराने वाला सरकारी स्कूल का कर्मचारी गिरफ्तार
खुलासा होने के बाद पुलिस की गिरफ्त में आया आरोपी। सौजन्‍य एआई

HighLights

  1. वर्तमान में अभाना के शासकीय हाई स्कूल में प्रयोगशाला प्रभारी है
  2. नरेंद्र यादव को मिशन अस्पताल में नियुक्त कराने में भूमिका निभाई थी
  3. उपचार से आधा दर्जन मरीजों की मौत होने के आरोप सामने आए थे

नईदुनिया प्रतिनिधि, दमोह । जिले के मिशन अस्पताल फर्जीवाड़ा कांड में पुलिस ने एक और आरोपित को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया है।

नियुक्त कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी

गिरफ्तार आरोपित दिलीप खरे पुत्र कमल खरे निवासी शक्तिनगर दमोह वर्तमान में अभाना के शासकीय हाई स्कूल में प्रयोगशाला प्रभारी है। पुलिस जांच में सामने आया है कि उसने ही फर्जी डिप्लोमाधारी डा. एन जान केम उर्फ नरेंद्र यादव को मिशन अस्पताल में नियुक्त कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

फर्जी योग्यता वाले डाक्टर को अस्पताल तक पहुंचाया

पुलिस के अनुसार करीब एक वर्ष पहले मिशन अस्पताल में कर्मचारी के रूप में कार्यरत रहते हुए दिलीप खरे ने फर्जी योग्यता वाले डाक्टर को अस्पताल तक पहुंचाया। कुछ ही महीनों के भीतर उक्त डाक्टर के उपचार से आधा दर्जन मरीजों की मौत होने के आरोप सामने आए।


डिग्रियों की जांच में कथित फर्जीवाड़े का खुलासा

बाद में उसकी डिग्रियों की जांच में कथित फर्जीवाड़े का खुलासा होने पर पुलिस ने गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया था। जांच के दौरान यह भी सामने सामने आया कि मिशन अस्पताल की कैथ लैब के पंजीयन में भी अनियमितताएं हुई थीं।

कैथ लैब संचालन से जुड़े फर्जीवाड़े में भी अहम भूमिका

इस संबंध में दर्ज दूसरे प्रकरण में भी पुलिस ने गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई की। कोतवाली टीआई मनीष कुमार ने बताया कि विवेचना में मिले साक्ष्यों के आधार पर दिलीप खरे की भूमिका स्पष्ट हुई। पुलिस का दावा है कि फर्जी डाक्टर की नियुक्ति कराने के साथ-साथ कैथ लैब संचालन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े में भी उसकी अहम भूमिका रही है।

विभिन्न धाराओं के तहत उसे आरोपी बनाया गया

इसके आधार पर सिटी कोतवाली के प्रकरण क्रमांक 225 व प्रकरण क्रमांक 245/25 में भारतीय न्याय संहिता बीएनएस, मध्य प्रदेश आयुष अधिनियम, मध्य प्रदेश उपचार गृह एवं रजोपचार अधिनियम तथा पासपोर्ट अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत उसे आरोपी बनाया गया है। दूसरे प्रकरण क्रमांक 245/25 में धारा 318/4, 336/2, 105 3 ; 5 बीएनएस व मप्र उपचार ग्रह रजोपचार अधिनियम की धारा 12 में भी मिशन अस्पताल कर्मचारी रहे दिलीप खरे को आरोपित बनाया गया है।

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