
जोगेंद्र सेन, नईदुनिया, दतिया। भाजपा और कांग्रेस के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बने दतिया विधानसभा सीट के उपचुनाव में 30 जुलाई को मतदान होना है। चुनाव प्रचार निर्णायक दौर में है। भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी भले चेहरा हों लेकिन पार्टी ने इसे पूरी तरह संगठन का चुनाव बना दिया है। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, प्रदेश सरकार के मंत्री, सांसद, विधायक, पूर्व मंत्री और निगम-मंडलों के अध्यक्ष अलग-अलग क्षेत्रों में डेरा डाले हुए हैं।
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की सभा हो चुकी है, जबकि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को दो चुनावी सभाएं कीं। इसके अलावा वह रोड शो, व्यापारियों व सामाजिक संगठनों की बैठकों के जरिये माहौल अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रहे हैं।
दूसरी ओर, कांग्रेस 2023 की जीत से ऊर्जावान है। प्रत्याशी घनश्याम सिंह स्थानीय और परिचित चेहरा हैं। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, राज्यसभा सदस्य अशोक सिंह, पूर्व मंत्री पीसी शर्मा और शुक्रवार को जयवर्धन सिंह ने चुनाव प्रचार की कमान संभाली। कांग्रेस भाजपा पर आरोपों और पूर्व विधायक राजेंद्र भारती के प्रति सहानुभूति को भी चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है।
धोखाधड़ी के आपराधिक मामले में सजा के बाद राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने से यह सीट रिक्त हुई थी। शुरुआती रूठने-मनाने का दौर अब समाप्त हो चुका है और दोनों दल घर-घर पहुंचकर हर मतदाता तक संपर्क साधने में जुटे हैं।
दतिया विधानसभा सीट कांग्रेस की परंपरागत सीट रही है। 2023 के चुनाव में भाजपा के तत्कालीन गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा को यहां हार का सामना करना पड़ा था। इस बार भाजपा ने संघ की पृष्ठभूमि के आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल लगातार क्षेत्र में डेरा डाले हुए हैं। भाजपा विकास कार्यों और सत्ता की ताकत को प्रमुख चुनावी मुद्दा बना रही है।
दो बार विधायक रह चुके प्रत्याशी घनश्याम सिंह कांग्रेस का सबसे बड़ा आधार हैं। हालांकि संगठनात्मक मजबूती को लेकर कांग्रेस सवालों के घेरे में है। दतिया में चुनाव प्रचार के दौरान कई वार्डों में दूसरे जिलों के पदाधिकारी मतदाता सूची लेकर प्रचार करते दिखाई दिए।
स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता भाजपा की तुलना में कम नजर आ रही है। कांग्रेस के स्टार प्रचारकों की कमी भी महसूस की जा रही है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह नामांकन के समय ही नजर आए, जबकि कमल नाथ अब तक चुनाव प्रचार से दूर हैं।
दतिया तिराहे पर लोगों का कहना था कि घनश्याम सिंह क्षेत्र का जाना-पहचाना चेहरा हैं, हालांकि विकास कार्यों को लेकर उनकी उपलब्धियां सीमित हैं। वहीं आशुतोष तिवारी पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन सत्ता और संगठन दोनों उनके साथ खड़े हैं।
ग्वालियर रोड स्थित गोपालपुर ढेरा के लखन सिंह का मानना है कि सत्ता में होने के कारण भाजपा विकास कराने की स्थिति में है किंतु घनश्याम सिंह को व्यक्तिगत पहचान का भी लाभ मिल सकता है। गोपालपुर के गजेंद्र यादव और कल्लू यादव का कहना है कि मुख्यमंत्री के चेहरे का भी चुनाव पर असर पड़ सकता है।
इस बीच, आजाद समाज पार्टी के प्रत्याशी दामोदर यादव भी लगातार जनसंपर्क कर मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच ही है।