
दीपक विश्वकर्मा, नईदुनिया, देवास। शराब कांड के मामले में देवास लगातार सुर्खियों में है। पहले चंदाना-बिंजाना में अवैध शराब सप्लाई का मामला सामने आया और अब खातेगांव में। यहां तो शराब माफियाओं ने टीआई को ट्रक से कुचल दिया। चंदाना मामले में देवास के आबकारी अधिकारी निलंबित हुए थे और खातेगांव मामले में हरदा के आबकारी अधिकारियों पर गाज गिरी, क्योंकि अवैध शराब हरदा के टिमरनी से निकली थी।
घटना के बाद आबकारी महकमे की कार्यशैली पर सवाल उठे। जिले में अवैध शराब का जो नेटवर्क बना है, उसे लेकर भी कहा जा रहा है कि सबकुछ पता होने के बाद भी आबकारी विभाग आंखें मूंदकर रहता है।
दरअसल, शराब की दुकान किस क्षेत्र में खुलेगी, लाइसेंस किसे मिलेगा, कितनी शराब खरीदी जाएगी और बिक्री का रिकॉर्ड कैसे रखा जाएगा, यह सब आबकारी विभाग के नियंत्रण और निगरानी के दायरे में आता है। लेकिन शराब कारोबार की जमीनी तस्वीर इससे अलग नजर आती है। ठेकों के क्षेत्र तय होने के बावजूद दूसरे ठेके के इलाके में शराब पहुंचाने की कोशिश होती है। डायरी पर शराब बेचने का जाना माना सिस्टम भी काम कर रहा है। मध्य प्रदेश से गुजरात तक शराब पहुंचने के मामले भी सामने आते रहे हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर है। जब विभाग के पास तंत्र है तो फिर शराब की वास्तविक आवाजाही पर उसका नियंत्रण कितना है?
चंदाना में जहरीली शराब से हुई मौतों की जांच में भी यही बात खुलकर सामने आई कि लाइसेंसधारी शराब दुकानों से जुड़े मैनेजर और सेल्समैन के जरिए अवैध रूप से शराब सप्लाई होती है। यानी शराब की सप्लाई केवल किसी अज्ञात अवैध विक्रेता से शुरू नहीं हो रही थी, बल्कि अधिकृत दुकानों से जुड़े लोगों तक इसकी कड़ी पहुंची। इसके बावजूद आबकारी विभाग इस पूरे मामले में अभी तक चुप्पी साधे बैठा है।
सूत्रों के अनुसार खातेगांव कांड के बाद आबकारी विभाग के देवास से वरिष्ठ अधिकारी खातेगांव पहुंचे। यहां शराब दुकान से शराब की बोतल भी लाई गई है। आशंका यह भी जताई जा रही है कि टिमरनी से खातेगांव तक शराब की लिंक जुड़ी हुई है। पूरे मामले में जिला आबकारी अधिकारी, क्षेत्र के निरीक्षक, उपनिरीक्षक तक ने चुप्पी साध रखी है।
खातेगांव में टीआई की हत्या के बाद आबकारी विभाग के जिम्मेदारों से कई बार खातेगांव की दुकान के स्टॉक, ड्यूटी आदि का सवाल पूछा गया, परन्तु अधिकारियों ने कोई ठोस जवाब नहीं दिया। सवाल यह है कि आबकारी विभाग के पास प्रत्येक दुकान का लाइसेंस और स्टॉक संबंधी रिकॉर्ड रहता है। शराब की खरीद और बिक्री का हिसाब भी दर्ज होता है। काउंटर से शराब की बिक्री के अलावा बाहर जा रही शराब का हिसाब क्यों नहीं होता?
सतवास: जत्रा मैदान और वार्ड-10 में डायरी सिस्टम से शराब की बिक्री
नगर जत्रा मैदान में डायरी सिस्टम से अवैध रूप से शराब बिक्री की जा रही है। इस संबंध में शिकायत भी की गई है हालांकि अभी तक कार्रवाई नहीं हुई है। स्थानीय लोगों के अनुसार मैदान के पास एक स्थान से खुलेआम शराब बेची जा रही है। यहां आए दिन शराब पीने को लेकर विवाद होते रहते हैं जिससे आसपास के रहवासियों एवं आम नागरिकों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। वहीं नगर के वार्ड क्रमांक-10 में भी अवैध शराब बिक्री होने की जानकारी सामने आई है। लोगों ने आबकारी विभाग एवं पुलिस से मांग की है कि जत्रा मैदान व वार्ड क्रमांक-10 में शराब बिक्री की जांच करते हुए सख्त कार्रवाई की जाए।
चापड़ा: नेशनल हाईवे और स्कूलों के पास तक फैला अवैध शराब का जाल
क्षेत्र में अवैध शराब का कारोबार खुलेआम फल-फूल रहा है। क्षेत्र में दो लाइसेंसी दुकानें संचालित हैं। वहीं अवैध रूप से शराब की बिक्री का जाल गली-मोहल्लों तक फैल चुका है। डायरी सिस्टम के माध्यम से शराब सप्लाई का नेटवर्क संचालित किया जा रहा है जिसमें कुछ चिह्नित व्यक्तियों द्वारा घरों, छोटी दुकानों और सार्वजनिक स्थानों तक शराब पहुंचाई जा रही है। युवा वर्ग तेजी से नशे की गिरफ्त में आता जा रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि स्कूलों, मंदिरों और नेशनल हाईवे के आसपास भी अवैध शराब की बिक्री हो रही है। नशे के बढ़ते प्रचलन के कारण क्षेत्र में झगड़े, मारपीट, सड़क दुर्घटनाएं और अन्य आपराधिक घटनाएं भी लगातार बढ़ रही हैं। कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है। वरिष्ठ स्तर से निर्देश मिलने पर दो-चार छोटी-मोटी कार्रवाई कर दी जाती है।
पीपरी: युवाओं के साथ किशोर भी गिरफ्त में; महिलाओं ने सौंपा था ज्ञापन
क्षेत्र में शराब की अवैध बिक्री का क्रम नहीं थम रहा है। नशे की आदत से कम उम्र के बच्चों का भविष्य खराब हो रहा है। कई युवाओं को नशे की लत ने बीमार बना दिया है। नशे के कारण कई परिवारों की आर्थिक स्थिति बिगड़ती जा रही है, कई परिवार कर्ज में डूब रहे हैं। करीब दो माह पूर्व ग्राम की महिलाओं ने पंचायत के माध्यम से पुलिस विभाग तक कच्ची शराब पर रोक लगाने के लिए ज्ञापन भेजा था, इस पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। ग्रामीणों के अनुसार कच्ची शराब में भी कुछ ऐसा पदार्थ मिलाया जा रहा है जो नशा अधिक देता है और धीरे-धीरे उसकी लत लग रही है और नशा करने वाले का शरीर कमजोर होता जा रहा है।