
नईदुनिया प्रतिनिधि, देवास: पुंजापुरा के जिनवानी रेंज में 13 जनवरी को हुई वन विभाग की कार्रवाई में पकड़े गए वाहन चालक अंकित जामोद की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने विवाद खड़ा कर दिया है। परिवार का आरोप है कि वनकर्मियों ने मारपीट की, जिससे गंभीर चोटें आईं। मृतक का अंतिम संस्कार पुलिस अभिरक्षा में हुआ। एसडीओ और वन विभाग का कहना है कि आरोपी भागते समय चोटिल हुआ और इलाज के बाद मुचलके पर छोड़ा गया।
जानकारी के अनुसार, 13 जनवरी की रात जिनवानी रेंज में उप वनमंडलाधिकारी (बागली) अंकित जामोद के निर्देशन में रेंज ऑफिसर तनय कुलश्रेष्ठ की टीम ने सिंगोड़ी-कांटाफोड़ मार्ग पर दबिश दी। पिकअप वाहन से 11 नग सागौन लठ्ठे जब्त किए गए और चालक अंकित पुत्र बलराम उईके को हिरासत में लिया गया।
अंकित को कार्रवाई के बाद कांटाफोड़ के अस्पताल में भर्ती कराया गया। परिवार ने बताया कि उसकी पीठ पर सात टांके लगे थे और कमर से नीचे का हिस्सा सुन्न हो गया था। इलाज के बावजूद उसकी जान नहीं बच सकी और उसे इंदौर के अरविंदो अस्पताल ले जाया गया।
मृतक की मां सुभद्रा बाई ने बताया कि मेरे बेटे की पीठ पर सात टांके आए थे। उसने खुद कहा था कि वन विभाग वालों ने बहुत मारा। मार इतनी थी कि कमर से नीचे का हिस्सा सुन्न हो गया, पैर ने काम करना बंद कर दिया। मृतक की मां सुभद्रा बाई ने आरोप लगाया कि वन विभाग वालों ने बेरहमी से मारपीट की। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की।
कांटाफोड़ पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की है। एसडीओ अंकित जामोद का कहना है कि आरोपी भागते समय चोटिल हुआ और विभाग ने उसका इलाज कराया, फिर मुचलके पर छोड़ दिया। बाद में मृतक की मौत हुई, जिसका विवरण विभाग के पास नहीं है।
मृतक का अंतिम संस्कार लोहारदा में पुलिस अभिरक्षा में किया गया। जांच के दौरान यह भी चर्चा में है कि अन्य आरोपी जिन्हें कार्रवाई में शामिल बताया गया, उन्हें छोड़ा गया।