
नईदुनिया प्रतिनिधि, देवास। इन दिनों भीषण गर्मी का दौर चल रहा है। इसी बीच जलसंकट की आहट भी हुई है। शहर के समीप स्थित इंदौर में पानी के लिए लोग परेशान हैं। देवास जिले के कुछ गांवों में भी पानी के लिए परेशानी है। शहर में फिलहाल जलसंकट जैसी स्थिति नहीं है।
बिजली कंपनी की लापरवाही जरूर ऐसी स्थिति बना रही, क्योंकि शटडाउन के कारण वाटर सप्लाय बाधित हो रहा और जल वितरण न होने से पानी की टंकियां समय पर नहीं भर पा रहीं। मजबूरी में लोगों को टैंकर बुलवाने पड़ रहे हैं।
जलसंकट की समस्या को लेकर प्रदेश सरकार भी चिंतित है। इसके चलते मुख्य सचिव अनुराग जैन ने भी वीसी के माध्यम से कलेक्टर-नगर निगम कमिश्नरों से चर्चा की। संबंधित जिलों की स्थितियां जानीं। सभी से बात कर निराकरण के निर्देश दिए और गाइडलाइन भी जारी की। इसमें बताया कि प्रत्येक जिले में कंट्रोल रूम बनाकर प्रतिदिन निगरानी की जाए।
कलेक्टर प्रतिदिन विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा करेंगे। ऊर्जा विभाग जल प्रदाय योजनाओं के लिए निर्बाध रूप से बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करे। शहरी क्षेत्र की पानी की टंकियों को भरने में समानता रखी जाए। जनप्रतिनिधियों के फीडबैक पर गंभीरता से कार्रवाई होगी। जरूरत वाले क्षेत्रों में पानी के टैंकर भेजे जाएंगे। अन्य विषयों पर भी जानकारी लेकर निर्देश दिए।
मुख्य सचिव के निर्देश के बाद प्रशासनिक अधिकारी काम में तो जुटे, लेकिन सवाल यह है कि क्या बिजली कंपनी के अधिकारी इस पर अमल करेंगे। बेतहाशा बिजली कटौती ने जीना मुहाल कर रखा है। मेंटेनेंस के नाम पर घंटों कटौती की जा रही, जिसका असर पेयजल पर पड़ रहा। इसे लेकर कलेक्टर भी सुस्त ही नजर आ रहे और जिम्मेदारों की कार्यशैली पर कोई बात नहीं कर रहे। जनप्रतिनिधियों की सुस्ती आलम एेसा है कि उन्हें चुनाव के वक्त ही समस्याओं के समाधान की फिक्र सताती है, शेष समय जनता से वास्ता नहीं रखते।
देवास जिले के कई गांवों में पेयजल की समस्या है। आदिवासी अंचलों के साथ कई कई अन्य गांवों में भी लोग पानी के लिए परेशान हैं। प्रशासन का दावा है कि जलसंकट जैसी स्थिति नहीं है, लेकिन लोगों के अनुसार उन्हें मशक्कत कर पानी की व्यवस्था करनी पड़ रही। नल जल योजना कागजों में ही चल रही। ग्राम पंचायतें भी गंभीरता नहीं दिखा रही। जनप्रतिनिधि सुशासन की बातों से इतर धरातल पर नहीं देख रहे।
देवास में फिलहाल जलसंकट की स्थिति नहीं है। यहां शिप्रा डैम से जल वितरण किया जा रहा। फिलहाल जलस्तर पूरा है। दो दिन तक एनवीडीए ने उज्जैन में पानी छोड़ा था, लेकिन इसका असर डैम के जल स्तर पर नहीं पडा़। दो दिन बाद फिर से एनवीडीए सप्लाय शुरू करेगा। बिजली कटौती के कारण असर पड़ रहा है। शटडाउन के चलते पेयजल टंकियां समय पर नहीं भर पा रही, जिस कारण जल वितरण भी देरी से हो रहा। इस कारण लोग शिकायत कर रहे। कई स्थानों पर पानी का प्रेशर कम है। नलों से होने वाले जल वितरण का टाइम भी कम किया गया है, जिस कारण स्टोरेज नहीं हो पा रहा। लोग मजबूरन टैंकर की मदद ले रहे। नगर निगम भी कुछ हिस्सों में टैंकर चलवा रहा है।
नगर निगम आयुक्त दलीप कुमार ने कहा कि देवास शहर में जलसंकट जैसे हालात नहीं है। शटडाउन के कारण पेयजल सप्लाय बाधित होती है। स्टोरेज और सप्लाय की समस्या नहीं है। सीएम हेल्पलाइन पर भी इसी तरह की शिकायतें आ रहीं। इसे लेकर वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत करवा दिया है। बिजली ट्रिपिंग अथवा कटौती न हो तो कोई समस्या नहीं है। हमने जो कंट्रोल रूम बनाया है, उसमें भी जलप्रदाय अनियमित होने की शिकायत आ रही, जिनका निराकरण करवा रहे। कुछ वार्ड एेसे हैं जहां पानी रीस्टोर होने में समय लगता है, जिस कारण प्रेशर व टाइमिंग की समस्या होती है। जहां डिमांड आती है वहां नगर निगम के टैंकर भेजे जाते हैं। शिप्रा डैम में भी भरपूर पानी है।