नईदुनिया प्रतिनिधि, धार। भोजशाला को लेकर एएसआइ द्वारा किया गया वैज्ञानिक सर्वेक्षण पूरे मामले का अहम आधार बना। हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ के निर्देश पर यह सर्वे तत्कालीन अतिरिक्त महानिदेशक प्रोफेसर आलोक त्रिपाठी के नेतृत्व में किया गया था।
रिपोर्ट में भोजशाला परिसर में मिले सभी पुरातात्विक अवशेषों, संरचनाओं और तथ्यों का वस्तुनिष्ठ उल्लेख किया गया। उन्होंने कहा कि यह कार्य अत्यंत चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि सर्वे के दौरान न्यायालय द्वारा तय प्रत्येक दिशा-निर्देश का सूक्ष्मता से पालन करना जरूरी था।
किस क्षेत्र में कार्य होना है, कितने हिस्से में सर्वे करना है और किन सीमाओं के भीतर रहकर पूरी प्रक्रिया करनी है, इन सभी बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए कार्य किया गया।
प्रो. त्रिपाठी के अनुसार, निर्धारित समय-सीमा में लगातार करीब 100 दिनों तक सर्वे कार्य चला। इसके बाद तथ्य संकलन, परीक्षण और दस्तावेजीकरण में भी कई दिन लगे, तब जाकर अंतिम रिपोर्ट तैयार कर न्यायालय को सौंपी गई।
सर्वेक्षण और अनुसंधान कार्य में जुल्फेकार अली, भुवन विक्रम, गौतमी भट्टाचार्य, मनोज कुमार कुर्मी, इजहार आलम हाशमी, आफताब हुसैन, शंभू नाथ यादव और निरज कुमार मिश्रा ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। पूरी टीम भोजशाला परिसर में वैज्ञानिक जांच, पुरातात्विक सर्वे और उत्खनन कार्य से जुड़ी रही।