
नईदुनिया प्रतिनिधि, धार। बरसों का संघर्ष आज पूरा हुआ। 90 वर्षीय हिंदू नेता विमल गोधा ने कहा कि दो-तीन पीढ़ियों से यह संघर्ष लगातार चले आ रहा था, जो आज पूरा हुआ है। हमने न केवल मैदानी स्तर पर लड़ाई लड़ी, बल्कि लाठियां भी खाईं। इसके बाद भी हम कमजोर नहीं हुए और लगातार अपने हक की लड़ाई लड़ते रहे। मुझे वो दौर याद आता है कि जब कांग्रेस सरकार में दमनकारी नीति अपनाई जाती थी और लोगों को जेल भेज दिया जाता था। आज सकारात्मक स्थिति है। भोजशाला की मुक्ति का आंदोलन अभी भी जारी रहेगा, जब तक कि पूर्ण रूप से हम अपना अधिकार नहीं ले लेते।
लोगों की मांग है सरस्वती लोक बने। आंदोलन के सक्रिय कार्यकर्ता गोपाल शर्मा ने कहा कि हम बरसों से यह लड़ाई लड़ते आ रहे थे। हमने इसमें कभी भी राजनीति नहीं की, केवल धर्म की लड़ाई लड़ी। प्रति मंगलवार को सत्याग्रह में हिंदू समाज ने यहां पहुंचकर अपनी एकजुटता दिखाई। इसी के चलते गत वसंत पंचमी पर शुक्रवार होते हुए भी अखंड पूजा हुई। यह पहली जीत थी और अब उससे भी बड़ी जीत यह है कि हाई कोर्ट ने हमें पूर्ण अधिकार दिया है। हम मंगलवार को भोजशाला में उत्साह के साथ सत्याग्रह करेंगे और इस फैसले का स्वागत भी करेंगे। साथ ही लोगों की मांग अनुसार भोजशाला को सरस्वती लोक बनाने के प्रयास भी शुरू किए जाएंगे।
हमारा विश्वास और आस्था जीती। हिंदू नेता अशोक जैन ने कहा कि हमें पूरा विश्वास था कि हिंदू समाज की जीत होगी। बरसों से हम यह कहते आ रहे थे कि भोजशाला मंदिर है। इसका हर पत्थर अपने आप में प्रमाण है। इसके बावजूद यहां पर ध्यान नहीं दिया जा रहा था। हमने विषम हालात में भी संघर्ष किया। वहीं जब यह लगा कि सरकार नहीं सुन रही है तो हमने सरकार का विरोध भी किया। हमने धर्म की लड़ाई लड़ी है और आज हमारे विश्वास और आस्था की जीत हुई है।
हाई कोर्ट का फैसला सबसे महत्वपूर्ण। हिंदू नेता विश्वास पांडे ने कहा कि हाई कोर्ट ने जो फैसला दिया है वह सत्य को सिद्ध करने वाला है। जब भी कोई भोजशाला भ्रमण करने आता था तो यह स्पष्ट हो जाता था कि यह मंदिर है। अब इस मंदिर के साथ-साथ हम चाहेंगे कि यहां सरस्वती लोक बने। मुख्य रूप से यह हिंदू समाज की जीत है। सर्वे में बड़ी संख्या में हिंदू मंदिर के प्रमाण मिले थे और उन प्रमाणों के आधार पर ही आज हमें अपना अधिकार मिला है।
संगठित हिंदू की जीत। भोज उत्सव समिति के हेमंत दौराया ने कहा कि यह फैसला वास्तव में सच की जीत है। साथ ही हिंदू समाज ने संगठित होकर जो बरसों से लड़ाई लड़ने का बीड़ा उठाया था, उसकी भी जीत है। निश्चित रूप से इस आंदोलन में कई लोगों ने अपना योगदान दिया है। इसमें हमारे तीन लोग बलिदानी भी हुए थे। आज हम उनका भी स्मरण करते हैं। न्यायालय ने जो फैसला दिया है, वह स्वागत योग्य है।
पूजा का पूर्ण अधिकार मिला। भोज उत्सव समिति के महामंत्री सुमित चौधरी ने कहा कि अब भोजशाला में हिंदू समाज को पूजा का पूर्ण अधिकार मिल गया है। इस तरह के अधिकार की कल्पना हमने गत जनवरी में कर ली थी। इसकी वजह यह है कि जब हमने सारे प्रमाण जुटाकर दिए थे, तो हमें विश्वास था कि सच सामने आएगा। भारतीय पुरातत्व विभाग का सर्वे इसमें अहम रहा है। इससे हिंदू समाज के मान धरोहर की प्राप्ति हुई है।