जश्न में डूबा मालवा... भोजशाला पर हाईकोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद MP से आईं खुशी और उत्सव की तस्वीरें
Bhojshala Dispute: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने धार स्थित भोजशाला परिसर को मां वाग्देवी का मंदिर माना है। ...और पढ़ें
Publish Date: Fri, 15 May 2026 04:08:03 PM (IST)Updated Date: Fri, 15 May 2026 04:09:31 PM (IST)
भोजशाला पर हाई कोर्ट के बड़े फैसले के बाद क्षेत्र में खुशी और उत्साह का माहौल देखा गया।HighLights
- मुस्लिम पक्ष को अलग जमीन देने की बात कही गई
- भोजशाला विवाद पर चार वर्षों से सुनवाई चल रही थी
- फैसले के बाद धार और मालवा में जश्न का माहौल
नईदुनिया प्रतिनिधि, धार। मध्य प्रदेश के धार जिले स्थित भोजशाला परिसर (Dhar Bhojshala Dispute) को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। इंदौर बेंच के जज ने फैसला पढ़ते हुए भोजशाला परिसर को मंदिर माना है। कोर्ट ने अपने आदेश में परिसर को मां वाग्देवी के मंदिर के रूप में स्वीकार किया।
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मुस्लिम पक्ष को अलग जमीन देने की बात
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि मुस्लिम पक्ष को अलग से जमीन दी जाएगी। भोजशाला विवाद लंबे समय से धार्मिक और कानूनी बहस का विषय बना हुआ था। फैसले के बाद धार और मालवा क्षेत्र में उत्साह और जश्न का माहौल देखने को मिला।
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वर्षों तक चला आंदोलन
भोजशाला को लेकर चला आंदोलन केवल धार्मिक या कानूनी लड़ाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह मालवा के बड़े जनआंदोलनों में शामिल हो गया। इस दौरान सत्याग्रह, लाठीचार्ज, गिरफ्तारी, कर्फ्यू और प्रशासनिक कार्रवाई जैसे कई घटनाक्रम सामने आए।
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क्या है भोजशाला विवाद?
यह विवाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) संरक्षित भोजशाला परिसर के धार्मिक स्वरूप को लेकर था। हिंदू पक्ष इसे मां सरस्वती का मंदिर और प्राचीन विद्या केंद्र मानता था, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता रहा। वहीं जैन समुदाय के एक पक्ष ने इसे मध्यकालीन जैन मंदिर और गुरुकुल बताया था।
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चार वर्षों से चल रही थी सुनवाई
हिंदू पक्ष ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर भोजशाला को मंदिर घोषित करने और वर्षभर 24 घंटे पूजा-अर्चना की अनुमति देने की मांग की थी। इस मामले में पिछले चार वर्षों से सुनवाई जारी थी।
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