
नईदुनिया प्रतिनिधि, धार। मध्यप्रदेश के धार स्थित भोजशाला (Dhar Bhojshala Dispute) परिसर को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद में इंदौर स्थित हाईकोर्ट की बेंच ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने ऐतिहासिक तथ्यों, एएसआई रिपोर्ट और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करते हुए भोजशाला को मंदिर के रूप में स्वीकार किया है।
फैसले से पहले पूरे धार शहर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। प्रशासन ने करीब 1200 पुलिसकर्मियों की तैनाती की थी। सोशल मीडिया पर भ्रामक और आपत्तिजनक पोस्ट को लेकर भी प्रशासन ने सख्त चेतावनी जारी की थी। शुक्रवार होने और नमाज के समय को देखते हुए अतिरिक्त सतर्कता बरती गई।
फैसले के बाद धार के शहर काजी ने कहा कि वे हाई कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं। उन्होंने बताया कि सलमान खुर्शीद ने मामले में प्रभावी पक्ष रखा। अब फैसले का अध्ययन किया जाएगा और इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की जाएगी। शहर काजी ने कहा कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट से उम्मीद है और मुस्लिम पक्ष अपना दावा जारी रखेगा।
#WATCH | Madhya Pradesh | On Dhar Bhojshala case verdict, Dhar Shahar Qazi Waqar Sadiq says, "We will review the decision that has been given against us. We will challenge the verdict in the Supreme Court..." pic.twitter.com/XIR7gPEWkQ
— ANI (@ANI) May 15, 2026
11वीं सदी के इस ऐतिहासिक स्मारक को लेकर हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। हिंदू पक्ष भोजशाला को माता सरस्वती यानी वाग्देवी का प्राचीन मंदिर मानता रहा है, जबकि मुस्लिम समुदाय इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है। वहीं जैन समुदाय के एक वर्ग ने इसे प्राचीन जैन मंदिर और गुरुकुल बताया था।
मामले में हाई कोर्ट ने 11 मार्च 2024 को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को वैज्ञानिक सर्वेक्षण का आदेश दिया था। 22 मार्च 2024 से शुरू हुए सर्वेक्षण में 98 दिनों तक अध्ययन किया गया। एएसआई ने अपनी 2000 से अधिक पन्नों की रिपोर्ट में उल्लेख किया कि मौजूदा संरचना से पहले यहां परमार काल का विशाल मंदिर मौजूद था और निर्माण में मंदिर के अवशेषों का उपयोग किया गया।