‘जय मां वाग्देवी’ के जयघोष से गूंजी ऐतिहासिक भोजशाला, 365 दिन पूजा का अधिकार मिलने के बाद लगाया मां की तस्वीर का कटआउट
हाई कोर्ट के महत्वपूर्ण निर्णय और उसके बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा प्रतिदिन पूजा की अनुमति दिए जाने के पश्चात पहली बार बड़ी संख्या में ...और पढ़ें
Publish Date: Sun, 17 May 2026 07:33:01 AM (IST)Updated Date: Sun, 17 May 2026 08:40:53 AM (IST)
भोजशाला में मां वाग्देवी का कटआउट लेकर पहुंचे श्रद्धालु। (नईदुनिया प्रतिनिधि)HighLights
- बड़ी संख्या में सनातन धर्मावलंबी मां वाग्देवी का कटआउट लेकर भोजशाला पहुंचे
- पूरे परिसर में ‘राजा भोज की जय’, “मां वाग्देवी की जय” और वैदिक मंत्रोच्चार की गूंज सुनाई देती रही
- ढोल-नगाड़ों, बैंड-बाजों और जयघोष के साथ श्रद्धालुओं ने भोजशाला परिसर में प्रवेश किया
नईदुनिया प्रतिनिधि, धार। धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला में रविवार को एक ऐसा दृश्य दिखाई दिया, जिसने वर्षों पुराने संघर्ष, आस्था और प्रतीक्षा को एक नई दिशा दे दी। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के महत्वपूर्ण निर्णय और उसके बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा प्रतिदिन पूजा की अनुमति दिए जाने के पश्चात पहली बार बड़ी संख्या में सनातन धर्मावलंबी मां वाग्देवी का कटआउट लेकर भोजशाला पहुंचे। पूरे परिसर में ‘राजा भोज की जय’, “मां वाग्देवी की जय” और वैदिक मंत्रोच्चार की गूंज सुनाई देती रही।
सुबह से ही श्रद्धालुओं का उत्साह देखते बन रहा था। ढोल-नगाड़ों, बैंड-बाजों और जयघोष के साथ श्रद्धालुओं ने भोजशाला परिसर में प्रवेश किया। महिलाएं, युवा, बुजुर्ग और बच्चे हाथों में मां सरस्वती के चित्र और धार्मिक ध्वज लिए पहुंचे। वातावरण पूरी तरह धार्मिक और उत्सवी रंग में रंगा नजर आया।
सुरक्षा एजेंसी के कर्मचारियों ने जताई आपत्ति
प्रारंभ में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की अनुबंधित सुरक्षा एजेंसी के कर्मचारियों ने मां सरस्वती वाग्देवी का कटआउट अंदर ले जाने पर कुछ मिनटों के लिए आपत्ति जताई। लगभग तीन से चार मिनट तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई। इसके बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अधिकारियों से मोबाइल पर चर्चा की गई, जिसके पश्चात कटआउट को अंदर ले जाने की अनुमति प्रदान कर दी गई। अनुमति मिलते ही श्रद्धालुओं में उत्साह और बढ़ गया तथा मां वाग्देवी के चित्र की स्थापना पूरे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ की गई।
वर्षों की आस्था, संघर्ष और सांस्कृतिक पहचान की विजय का क्षण है
भोजशाला परिसर में लंबे समय बाद ऐसा धार्मिक उत्साह दिखाई दिया, जैसा बसंत पंचमी और मंगलवार के अवसरों पर देखने को मिलता था। श्रद्धालुओं का कहना था कि यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि वर्षों की आस्था, संघर्ष और सांस्कृतिक पहचान की विजय का क्षण है।
महाआरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए
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उच्च न्यायालय द्वारा हिंदू समाज को भोजशाला स्थित मां सरस्वती मंदिर में प्रतिदिन पूजा का अधिकार दिए जाने के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने भी वर्ष के सभी 365 दिनों तक पूजा की अनुमति प्रदान कर दी है। इसी क्रम में रविवार सुबह छह बजे से धार्मिक अनुष्ठानों के साथ नियमित पूजा प्रारंभ हुई। वैदिक पंडितों द्वारा मंत्रोच्चार के बीच हवन-पूजन का आयोजन किया गया, जो दोपहर 11:30 बजे तक चला। इसके पश्चात महाआरती संपन्न हुई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
आयोजकों और भोज उत्सव समिति के पदाधिकारियों ने इसे भारतीय संस्कृति, ज्ञान और सनातन परंपरा के पुनर्जागरण का क्षण बताया। उन्होंने समाज के लोगों से प्रतिदिन दर्शन, आरती और धार्मिक आयोजनों में शामिल होने की अपील की। शाम 5:30 बजे संध्या आरती का आयोजन भी किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति रही।
भोजशाला में रविवार को दिखाई दिया यह दृश्य केवल धार या मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देशभर में सनातन आस्था, सांस्कृतिक चेतना और मां सरस्वती के प्रति श्रद्धा के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है। सदियों पुराने इस ऐतिहासिक स्थल पर गूंजते शंख, मंत्र और जयघोष ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा आज भी जीवंत है।