
नईदुनिया प्रतिनिधि, डिंडौरी। मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल डिंडौरी जिले में छात्रावास में रहने वाले बच्चों को दौड़ना था, फुटबॉल खेलना था, लेकिन उनके पास जूते नहीं थे। वर्षा सीजन में कीचड़ भरे मैदानों पर बिना जूतों के खेलना जोखिमभरा है। इंफेक्शन और कीड़े-मकोड़ों का डर बना रहता है। इस कारण उनकी गतिविधियां सीमित हो गईं।
200 बच्चों को जूते-मौजे वितरित
यह जानकारी कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया को लगी तो उन्होंने सोल ऑफ सोल अभियान शुरू किया, जिसके तहत करीब 200 बच्चों को जूते-मोजे वितरित किए गए हैं।
दरअसल, कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया सात अगस्त को अमरपुर के छात्रावास का निरीक्षण करने पहुंची थीं। वहां खेल गतिविधियां ठप होने पर कलेक्टर ने वजह पूछी तो बच्चों ने कहा उनके पास जूते नहीं हैं। तभी कलेक्टर ने जिले के सभी छात्रावासों में बच्चों को जूते उपलब्ध कराने की योजना बनाई।
29 अगस्त को इसकी शुरुआत माओवाद प्रभावित क्षेत्र रहे गौराकन्हारी के आदिवासी बालक छात्रावास से की गई, जहां कलेक्टर ने खुद बच्चों को मौजे-जूते पहनाए।
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अधिकारियों ने खुद से जुटाया पैसा
बता दें कि, यह समस्या सिर्फ अमरपुर तक सीमित नहीं है। जिले के सभी 144 छात्रावासों में बड़ी संख्या में रहने वाले विद्यार्थी बिना जूते-चप्पल के हैं। इसके लिए सरकारी फंड उपलब्ध न होने के कारण अधिकारियों ने खुद से पैसा जुटाया।
बैंकों के सीएसआर फंड से भी इसे जोड़ने की तैयारी है। कलेक्टर ने कहा इस अभियान को सभी छात्रावास तक ले जाने और सभी बच्चों को जूते उपलब्ध कराने का प्रयास है।
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