ग्वालियर में दुनिया के सबसे दुर्लभ ब्लड ग्रुप की महिला के लिए देश भर में मची दौड़, प्रसूता के लिए विशाखापत्तनम-लखनऊ से आया खून
जयारोग्य चिकित्सालय समूह के ब्लड बैंक ने तत्परता की मिसाल पेश की है, जिससे छतरपुर की प्रसूता को नई जिंदगी मिली। डिलीवरी के बाद गंभीर हालत में रेफर होक ...और पढ़ें
Publish Date: Sat, 07 Mar 2026 10:58:51 PM (IST)Updated Date: Sat, 07 Mar 2026 10:58:50 PM (IST)
ब्लड ग्रुप की महिला के लिए देश भर में मची दौड़।HighLights
- ग्वालियर में सामने आया बाम्बे ब्लड ग्रुप का दुर्लभ मामला
- दो राज्यों से एयरलिफ्ट कर पहुंचाया गया दो यूनिट खून
- प्रसूता के लिए विशाखापत्तनम और लखनऊ से आया खून
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। जयारोग्य चिकित्सालय समूह के ब्लड बैंक ने तत्परता की मिसाल पेश की है, जिससे छतरपुर की प्रसूता को नई जिंदगी मिली। डिलीवरी के बाद गंभीर हालत में रेफर होकर आई महिला को जब खून की जरूरत पड़ी, तो जांच में उसका ब्लड ग्रुप दुनिया के सबसे दुर्लभ बाम्बे ब्लड ग्रुप के रूप में पाया गया।
लाखों में से किसी एक व्यक्ति में पाया जाता है
छतरपुर निवासी मालती पाल को प्रसव के बाद हुई जटिलताओं के कारण जेएएच रेफर किया गया था। वह जनरल मेडिसिन विभाग में उपचाररत थीं। इलाज के दौरान जब उन्हें ब्लड ट्रांसफ्यूजन (खून चढ़ाने) की आवश्यकता पड़ी, तो जेएएच ब्लड बैंक में उनके रक्त के नमूनों की जांच की गई। विशेषज्ञों ने पाया कि मालती का ब्लड ग्रुप सामान्य (ए, बी, एबी या ओ) नहीं, बल्कि अत्यंत दुर्लभ बाम्बे ब्लड ग्रुप है, जो लाखों में से किसी एक व्यक्ति में पाया जाता है।
विशाखापत्तनम और लखनऊ से जुटाया गया दुर्लभ रक्त
मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए ब्लड बैंक प्रबंधन ने बिना समय गंवाए इंटर ब्लड सेंटर ट्रांसफर प्रक्रिया शुरू की। ग्वालियर में इस ग्रुप का रक्त उपलब्ध न होने पर देश भर के ब्लड सेंटरों से संपर्क साधा गया। कड़ी मशक्कत के बाद पहली यूनिट विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश) से सुरक्षित तरीके से मंगवाई गई।
दूसरी यूनिट केजीएमसी (लखनऊ, उत्तर प्रदेश) के ब्लड सेंटर से उपलब्ध करवाई गई। इन दोनों यूनिट्स को विशेष कोल्ड चेन और सुरक्षा मानकों के साथ ग्वालियर लाया गया, जिसके बाद महिला को सफलतापूर्वक ब्लड चढ़ाया जा सका।
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क्या होता है बाम्बे ब्लड ग्रुप?
चिकित्सकों के अनुसार इस ग्रुप को 'एचएच' ब्लड ग्रुप भी कहा जाता है। इसकी खोज पहली बार मुंबई (तब बाम्बे) में हुई थी, इसलिए इसका नाम बाम्बे ब्लड ग्रुप पड़ा। इस ग्रुप के व्यक्ति को केवल इसी ग्रुप का खून चढ़ाया जा सकता है, जो मिलना बहुत चुनौतीपूर्ण होता है।
मरीज की जान बचाना हमारी पहली प्राथमिकता थी। दुर्लभ ग्रुप होने के कारण हमें बाहरी राज्यों से संपर्क करना पड़ा। विशाखापत्तनम और लखनऊ के ब्लड सेंटरों के सहयोग से समय रहते रक्त उपलब्ध हो सका।- डॉ. मनीष चतुर्वेदी, प्रवक्ता, जेएएच