रेलवे का नकली दफ्तर दिखाकर रिटायर्ड कर्मचारी से 7.40 लाख की साइबर ठगी, मोबाइल हैक कर साफ किया खाता
इस मामले में ठग ने फंसाने के लिए बाकायदा रेलवे के कार्यालय जैसा कमरा तैयार किया था। इसमें कॉल करने वाले के पीछे भारतीय रेल का बोर्ड भी नजर आ रहा था।
Publish Date: Thu, 02 Jul 2026 08:54:39 AM (IST)Updated Date: Thu, 02 Jul 2026 08:55:05 AM (IST)
एआई से बना चित्र।HighLights
- डिजिटल अरेस्ट जैसी शातिर चाल
- 15 मिनट में मोबाइल हैक कर दो बार में उड़ाए पैसे
- ठगों ने पीछे 'भारतीय रेल' का बोर्ड लगाकर किया वीडियो कॉल
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। शहर के हजीरा इलाके में रहने वाले रिटायर्ड रेलवे कर्मचारी के साथ 7.40 लाख रुपये की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। ठग ने खुद को रेलवे की पेंशन शाखा का कर्मचारी बताया। पेंशन वेरीफिकेशन की प्रक्रिया के बहाने वीडियो कॉल किया।
वेरिफिकेशन के बहाने भेजी लिंक
इस दौरान लिंक दी, जिससे सारी प्रक्रिया भी बुजुर्ग से करवाई। इसके बाद मोबाइल हैक कर बैंक खाते में दो बार सेंध लगाई। दो बार में 7.40 लाख रुपये निकाल लिए। इस मामले में क्राइम ब्रांच थाने में एफआईआर दर्ज हुई है। साइबर क्राइम विंग ने वह बैंक खाते चिह्नित किए हैं, जिनमें पैसा गया है।
हजारी इलाके के रहने वाले है बुजुर्ग
हजीरा के चार शहर का नाका स्थित रानीपुरा इलाके में रहने वाले बनवारी पुत्र जगन्नाथ शर्मा रेलवे से रिटायर्ड हैं। उनके मोबाइल पर 30 जून को सुबह 10.21 बजे 637283848 नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने उनसे सीधे कहा कि उनकी पेंशन रुक सकती है। वह झांसी रेल मंडल की पेंशन शाखा से बात कर रहा है। अगर पेंशन वेरीफिकेशन नहीं किया तो पेंशन रुक जाएगी।
ठगी की शुरुआत हुई 5 लाख से
इसके बाद वीडियो कॉल पर सारी प्रक्रिया करने की बात कही। बनवारी को लगा कि वाकई यह कॉल रेलवे विभाग से ही है। उन्होंने वीडियो कॉल रिसीव किया, इसके बाद जैसा वह बोलता गया वो वैसा ही करते गए। उनका मोबाइल हैक हुआ और पहली बार में बैंक खाते से पांच लाख रुपये। इसके बाद 2.40 लाख रुपये निकल गए। दो बार में उनके खाते से 7.40 लाख रुपये निकल गए, तब उन्हें ठगी का पता लगा। फिर वह एसएसपी कार्यालय पहुंचे। यहां क्राइम ब्रांच थाने में एफआईआर दर्ज कराई।