नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। बेहतर शिक्षा, उज्ज्वल भविष्य यह स्लोगन अब केवल महंगे निजी स्कूलों के चमकते विज्ञापनों तक सीमित नहीं रहा। ग्वालियर व चंबल संभाग की सड़कों पर इन दिनों एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। शहर के प्रमुख चौराहों से लेकर मुख्य मार्गों तक, सरकारी स्कूलों की ब्रांडिंग के बड़े-बड़े होर्डिंग्स और बैनर नजर आ रहे हैं।
प्रदेश सरकार अब निजी स्कूलों की तर्ज पर सीएम राइज (सांदीपनि) स्कूलों की ब्रांडिंग कर रही है, जो शिक्षा के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत का संकेत है। यदि विज्ञापन की तरह ही धरातल पर भी शिक्षा की गुणवत्ता निजी स्कूलों के बराबर रही, तभी प्रायवेट स्कूलों से कंप्टीशन सरकारी स्कूल कर पाएंगे। फिलहाल, सड़कों पर लगे यह होर्डिंग्स बता रहे हैं कि अब सरकारी मास्टर और सरकार, दोनों ही प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हैं।
ट्रेंड में आया बड़ा बदलाव
आमतौर पर धारणा रही है कि सरकारी स्कूलों में प्रवेश के लिए न तो विभाग रुचि दिखाता है और न ही शिक्षक कोई विशेष प्रयास करते हैं। सरकारी स्कूलों की छवि अक्सर जर्जर भवनों और सुविधाओं के अभाव वाली रही है, लेकिन अब यह ट्रेंड पूरी तरह बदल चुका है। ग्वालियर व मुरैना में प्रमुख स्थानों पर लगे सांदीपनि स्कूलों के होर्डिंग्स राहगीरों का ध्यान अपनी ओर खींच रहे हैं। इन विज्ञापनों में स्कूलों की अत्याधुनिक लैब, स्मार्ट क्लास, लाइब्रेरी और खेल सुविधाओं को प्रमुखता से दर्शाया गया है।
निजी स्कूलों को मिल रही कड़ी टक्कर
जिले में संचालित सीएम राइज स्कूलों को सरकार सांदीपनि ब्रांड के तहत प्रमोट कर रही है। जिस तरह शहर के नामी प्राइवेट स्कूल सत्र शुरू होने से पहले करोड़ों रुपये विज्ञापन पर खर्च करते हैं, वैसी ही व्यावसायिक और आकर्षक ब्रांडिंग अब सरकारी स्तर पर की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य अभिभावकों के मन में सरकारी शिक्षा के प्रति विश्वास पैदा करना है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार का यह कदम सकारात्मक है, क्योंकि इससे आम मध्यमवर्गीय परिवार के बच्चों को यह एहसास होता है कि वे भी विश्वस्तरीय सुविधाओं वाले स्कूल में पढ़ सकते हैं।
शिक्षा का नया कार्पोरेट अवतार
संभाग में शिक्षा विभाग के अधिकारियों का मानना है कि ब्रांडिंग से स्कूलों के प्रति सम्मान बढ़ता है। सीएम राइज स्कूलों में न केवल बस सुविधा दी जा रही है, बल्कि यहां का स्टाफ भी विशेष रूप से प्रशिक्षित है। होर्डिंग्स पर इन सुविधाओं का उल्लेख होने से ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले छात्रों और उनके अभिभावकों में एक नई उम्मीद जगी है।
यह सुविधाएं हैं सांदीपनि स्कूलों में
इन स्कूलों में स्मार्ट क्लास, सर्वसुविधायुक्त लैब और प्रशिक्षित स्टाफ जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, साथ ही इन स्कूलों में परिवहन की सेवा भी दिया जाना है। लेकिन मामला न्यायालय में होने से यह सुविधा नहीं मिल पा रही है। सरकार का लक्ष्य चरणबद्ध तरीके से प्रदेश के हर ब्लाक में कम से कम एक ऐसा उत्कृष्ट स्कूल तैयार करना है।
इन्होंने कहा...
सांदीपनि स्कूल में छात्रों को सभी सुविधाएं मिल रही हैं। इनका परिणाम भी अच्छा है। इसलिए इनके होर्डिंग शासन ने लगवाए हैं, जिससे लोगों केा सांदीपनि स्कूलों के बारे में व उनकी सुविधाओं के बारे में जानकारी मिल सके। -अरविंद सिंह, उप संचालक शिक्षा