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नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। शहर में लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर अब उपभोक्ताओं के लिए परेशानी का सबब बनते जा रहे हैं। स्मार्ट मीटर लगते ही बिजली की खपत में अचानक कई गुना की वृद्धि दर्ज की जा रही है, जिससे आमजन का बजट पूरी तरह गड़बड़ा गया है।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि घरों में उपकरण वही पुराने हैं, कोई नया लोड नहीं बढ़ाया गया है, फिर भी मीटर बुलेट ट्रेन की रफ्तार से भाग रहे हैं। इस समस्या को लेकर उपभोक्ता पिछले एक महीने से बिजली कंपनी के दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई करने वाला कोई नहीं है।
सिकंदर कंपू के निवासी आरएस राठौर पिछले एक माह से बिजली कंपनी के अधिकारियों के सामने गुहार लगा रहे हैं। उनका कहना है कि जब से उनके घर में स्मार्ट मीटर लगा है, तब से बिजली की रीडिंग पहले की तुलना में करीब चार गुना अधिक आ रही है। राठौर ने तारीख वार मीटर की दौड़ती रफ्तार का जो ब्योरा दिया है, वह स्मार्ट मीटरों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला गोवर्धन कॉलोनी (सिकंदर कंपू जोन) के निवासी जितेन्द्र सिंह भदौरिया का सामने आया है। पहले साधारण मीटर में मई महीने की रीडिंग औसतन 64 से 78 यूनिट आती थी, जिससे बिल महज 250 से 300 रुपये आता था। लेकिन स्मार्ट मीटर लगते ही मई महीने की रीडिंग सीधे चार गुना बढ़कर 198 यूनिट बता दी गई। अब जो बिल पहले 300 रुपये आता था, वह सीधा 1700 से 1900 रुपये के बीच आ रहा है।
क्षेत्र के उपभोक्ताओं का आरोप है कि बिजली कंपनी बिना किसी पुख्ता जांच के बढ़े हुए बिल थमा रही है। उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि घर का लोड या उपकरण बढ़े होते, तो बिजली बिल बढ़ना समझ आता है। लेकिन सब कुछ पहले जैसा होने के बावजूद मीटरों की यह जादुई रफ्तार बिजली कंपनी की तकनीक और साफ्टवेयर पर सवालिया निशान लगाती है।
नगर संभाग दक्षिण क्षेत्र के विभिन्न जोन से शिकायत मिलने के बाद विभाग द्वारा चेक मीटर लगाकर जांच कराई गई, लेकिन अब तक किसी भी मामले में मीटर के तेज चलने की पुष्टि नहीं हुई है। संतोष बिठ्ठल, उपमहाप्रबंधक, नगर संभाग दक्षिण