मां को नजरअंदाज कर बनाया वारिस, ग्वालियर कोर्ट ने रद किया उत्तराधिकार प्रमाणपत्र, अगली सुनवाई 12 मई को
रिकार्ड में यह भी सामने आया कि धर्मवीर शर्मा की सर्विस बुक में उनकी मां मुन्नीदेवी का नाम नामिनी के रूप में दर्ज था। ...और पढ़ें
Publish Date: Fri, 01 May 2026 03:22:18 PM (IST)Updated Date: Fri, 01 May 2026 03:30:24 PM (IST)
HighLights
- मां को हटाया, वारिसी रद
- कोर्ट ने पलटा फैसला
- वारिसी विवाद फिर गरमाया
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर: तृतीय जिला न्यायाधीश देवेश उपाध्याय ने एक अहम फैसले में निचली अदालत का आदेश रद्द कर दिया, जिसमें मृतक के सभी वैध वारिसों को शामिल किए बिना उत्तराधिकार प्रमाणपत्र जारी कर दिया गया था।
मां का नाम नामिनी के रूप में था दर्ज
मामले में अपीलकर्ता मुन्नीदेवी निवासी भिंड ने चुनौती दी थी कि उनके बेटे धर्मवीर शर्मा की मृत्यु के बाद उनकी दूसरी पत्नी सीता शर्मा, बच्चे संध्या और आशीष के पक्ष में 1/3-1/3 हिस्सा देते हुए उत्तराधिकार प्रमाणपत्र जारी कर दिया गया, जबकि उन्हें मां होने के बावजूद पक्षकार ही नहीं बनाया गया। रिकार्ड में यह भी सामने आया कि धर्मवीर शर्मा की सर्विस बुक में उनकी मां मुन्नीदेवी का नाम नामिनी के रूप में दर्ज था। इसके बावजूद ट्रायल कोर्ट ने इस महत्वपूर्ण पहलू पर विचार नहीं किया और न ही यह देखा कि मृतक के अन्य जीवित वारिस कौन हैं।
जानबूझकर केस से रखा बाहर
अपील में मुन्नीदेवी ने तर्क दिया कि उन्हें जानबूझकर केस से बाहर रखा गया, जिससे वे अपना पक्ष नहीं रख सकीं। वहीं सीता शर्मा ने निचली अदालत के आदेश को सही बताया। कोर्ट ने पाया कि मुन्नीदेवी मृतक की वैध मां और प्रथम श्रेणी की वारिस हैं, इसलिए उन्हें पक्षकार बनाना जरूरी था। ऐसा न करने से उनके अधिकार प्रभावित हुए और सुनवाई का अवसर भी नहीं मिला।
सभी पक्षों को उपस्थित होने के निर्देश
इसी आधार पर अदालत ने 26 फरवरी 2021 का आदेश रद करते हुए पूरे मामले को वापस ट्रायल कोर्ट भेज दिया। साथ ही निर्देश दिए कि मुन्नीदेवी को पक्षकार बनाकर सभी पक्षों को सुनवाई और साक्ष्य प्रस्तुत करने का पूरा मौका दिया जाए। अब सभी पक्षों को 12 मई को संबंधित न्यायालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं।