
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। एलिवेटेड रोड के पहले और दूसरे चरण के अंतर्गत स्वर्ण रेखा में सीवर चैंबर टूटने के कारण ग्वालियर से लेकर भोपाल तक हंगामा मचा हुआ है। नगरीय प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव (एसीएस) संजय दुबे ने ग्वालियर में निरीक्षण करने के बाद भोपाल में भी समीक्षा की है। अब इस मामले में पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने भी सख्त रुख अपना लिया है।
वर्षा से पहले स्वर्ण रेखा में मिट्टी हटाने और सीवर लाइन की मरम्मत के काम की जिम्मेदारी अब ठेकेदार कंपनियों को ही दी गई है। इसके अलावा कंपनियों के बिलों की राशि रोक ली गई है। पीएनसी इंफ्रा कंपनी ने हाल ही में पीडब्ल्यूडी को 10 करोड़ रुपये के भुगतान का बिल थमाया था, जिसके बदले में सिर्फ 149 रुपये का पेमेंट किया गया है।
श्रीमंगलम बिल्डकान कंपनी के साढ़े चार करोड़ रुपये के बिल के बदले सिर्फ 138 रुपये का भुगतान किया गया है। इसका कारण है कि कंपनियों द्वारा पूरी गति से मिट्टी हटाने और सीवर चैंबरों की मरम्मत का काम नहीं किया जा रहा है, लेकिन भुगतान के बिल जरूर प्रस्तुत किए गए थे।
पीडब्ल्यूडी मैनुअल के मुताबिक किसी भी कंपनी द्वारा दिए गए बिल के बदले शून्य भुगतान नहीं किया जा सकता है। ऐसे में 138 और 149 रुपये का भुगतान किया गया है। कंपनियों को निर्देश दिए गए हैं कि पूरे संसाधनों का इस्तेमाल कर अब स्वर्ण रेखा में टूटे चैंबरों को ठीक कराना है। गौरतलब है कि पिछले दिनों एसीएस के निरीक्षण व बैठक में भी ग्वालियर के अधिकतर इलाकों में जलभराव का कारण स्वर्ण रेखा में टूटे चैंबरों को बताया गया था, जिसके बाद एसीएस हर सप्ताह इस मामले की समीक्षा कर रहे हैं।
इस मामले में एसीएस संजय दुबे ने निर्देश दिए हैं कि एलिवेटेड रोड के दोनों चरणों का काम कर रहीं कंपनियों को अब तीन दिन के अंदर शपथ पत्र प्रस्तुत करने होंगे। उस शपथ पत्र में उल्लेख करना होगा कि 15 जून तक एलिवेटेड रोड निर्माण के कारण स्वर्ण रेखा में की गई खोदाई से निकली मिट्टी को हटाया जाएगा, साथ ही क्षतिग्रस्त सीवर लाइनों की मरम्मत का काम भी कंपनियां कराएंगी। ऐसा न करने की स्थिति में कंपनियों के खिलाफ एफआइआर तक दर्ज कराने का एक्शन किया जा सकता है।
विभागीय सूत्रों के मुताबिक वर्तमान में एलिवेटेड रोड के दूसरे चरण के अंतर्गत काम कर रही पीएनसी इंफ्रा द्वारा सीवर समस्या के समाधान में लापरवाही की जा रही है। ऐसे में पीडब्ल्यूडी के अधिकारी अब कंपनी को टर्मिनेशन का नोटिस देने की तैयारी में हैं। आंतरिक स्तर पर इसकी प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है और भोपाल स्थित विभाग के मुख्यालय में नोटशीट भी चल निकली हैं।
कंपनियों को स्वर्ण रेखा से मिट्टी हटाने और सीवर चैंबरों की मरम्मत के निर्देश दिए गए हैं। कंपनियों द्वारा भुगतान के लिए जो बिल प्रस्तुत किए गए थे, उनकी राशि को रोककर न्यूनतम भुगतान किया गया है। जोगिंदर यादव, कार्यपालन यंत्री पीडब्ल्यूडी सेतु संभाग