ग्वालियर महापौर डॉ. शोभा सिकरवार को हाई कोर्ट से बड़ी राहत, ‘महापौर निधि’ खत्म करने के आदेश पर रोक
महापौर पक्ष ने अदालत में यह तर्क भी रखा कि वर्षों से महापौर निधि, सभापति निधि और पार्षद निधि निगम बजट का हिस्सा रही हैं। ...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 14 May 2026 10:45:04 AM (IST)Updated Date: Thu, 14 May 2026 10:45:43 AM (IST)
HighLights
- नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने दिया था आदेश
- आदेश 2 मार्च 2026 को जारी हुआ था
- हाई कोर्ट ने मांगा जवाब, कहा- बजट में सीधे दखल कैसे?
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। ग्वालियर की महापौर डॉ. शोभा सिकरवार को ‘महापौर निधि’ मामले में हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने नगरीय विकास एवं आवास विभाग के उस आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है, जिसमें नगर निगम बजट से ‘महापौर निधि’ का प्रावधान समाप्त करने के निर्देश दिए गए थे।
यह आदेश 2 मार्च 2026 को जारी हुआ था। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य शासन को नोटिस जारी कर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए हैं। महापौर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एमपीएस रघुवंशी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर शासन के फैसले को मनमाना और भेदभावपूर्ण बताया।
याचिका में कहा गया कि नगरीय विकास विभाग का आदेश विधिसम्मत प्रक्रिया का पालन किए बिना जारी किया गया। दलील दी गई कि संविधान के अनुच्छेद 166(3) के तहत किसी भी सरकारी आदेश को राज्यपाल के नाम से जारी किया जाना चाहिए, जबकि इस मामले में ऐसा नहीं हुआ।
याचिका में यह भी कहा गया कि नगर निगम को स्थानीय स्वशासन संस्था के रूप में अपने बजट और विकास कार्यों के लिए राशि निर्धारित करने का अधिकार प्राप्त है। ऐसे में राज्य सरकार सीधे किसी विशेष मद में बजट प्रावधान समाप्त करने का निर्देश नहीं दे सकती।
महापौर पक्ष ने अदालत में यह तर्क भी रखा कि वर्षों से महापौर निधि, सभापति निधि और पार्षद निधि निगम बजट का हिस्सा रही हैं, लेकिन सरकार ने केवल ‘महापौर निधि’ को खत्म करने का आदेश दिया। इसे संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत समानता के अधिकार का उल्लंघन बताया गया है।
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि महापौर निधि का उपयोग सड़क, नाली, पेयजल, स्ट्रीट लाइट और अन्य छोटे विकास कार्यों में किया जाता रहा है। निधि समाप्त होने से स्थानीय विकास कार्यों और आम नागरिकों की समस्याओं के समाधान पर असर पड़ सकता है।