'शांति से समझा रहे हैं, नहीं माने तो सख्ती करेंगे': ग्वालियर में जलभराव पर हाई कोर्ट की नगर निगम को कड़ी चेतावनी
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से इस वर्ष प्री-मानसून की पहली बारिश के बाद वार्ड क्रमांक 18, 19 सहित अन्य क्षेत्रों में जलभराव और सीवर समस्या के फो...और पढ़ें
Publish Date: Tue, 30 Jun 2026 09:09:47 AM (IST)Updated Date: Tue, 30 Jun 2026 09:10:16 AM (IST)
सोशल मीडियाHighLights
- जनहित याचिका पर ग्वालियर हाई कोर्ट नाराज
- प्री-मानसून वर्षा के बाद बिगड़े हालात पर निगम से मांगा आश्वासन
- नगर निगम को हफ्ते भर में देना होगा जवाब
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। शहर में हर वर्ष वर्षा के दौरान होने वाली जलभराव और सीवर समस्या को लेकर मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने नगर निगम के प्रति कड़ा रुख अपनाया है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि हम अभी नगर निगम को शांति से समझा रहे हैं। यदि नहीं माने, तो सख्ती से पेश आना होगा। हमारा उद्देश्य ग्वालियर के नागरिकों को इन समस्याओं से राहत दिलाना है। जनहित याचिका पर कोर्ट ने की टिप्पणी
यह टिप्पणी पुष्कर कालोनी निवासी कैप्टन उद्देश्य सिंह भदौरिया द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान की गई। याचिका उनके अधिवक्ता अवधेश सिंह भदौरिया के माध्यम से प्रस्तुत की गई है। याचिका में कहा गया है कि पिछले वर्ष मानसून के दौरान शहर में जलभराव और सीवर ओवरफ्लो की गंभीर समस्या सामने आई थी, लेकिन नगर निगम और प्रशासन इसके स्थायी समाधान में विफल रहे। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से इस वर्ष प्री-मानसून की पहली बारिश के बाद वार्ड क्रमांक 18, 19 सहित अन्य क्षेत्रों में जलभराव और सीवर समस्या के फोटोग्राफ्स न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए गए।
अधिवक्ता ने तर्क दिया कि जब पहली ही वर्षा में शहर के हालात बिगड़ गए हैं, तो मानसून के दौरान स्थिति और भयावह हो सकती है। इस पर खंडपीठ ने नगर निगम के अधिवक्ता से पूछा कि क्या निगम यह आश्वासन देने को तैयार है कि इस वर्ष ग्वालियर में पिछले वर्ष जैसी जलभराव और सीवर की समस्या नहीं होगी। नगर निगम की ओर से जवाबदाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा गया, जिसे स्वीकार करते हुए न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह निर्धारित की है।