
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। भद्रा का साया और चंद्रग्रहण के बीच होलिका दहन दो मार्च को प्रदोष काल में किया जाएगा। फाल्गुन की पूर्णिमा सोमवार को शाम पांच बजकर 55 मिनट से शुरू हो रही है, और पूर्णिमा लगने के साथ ही भद्रा भी शुरू हो जाएगी। भद्रा इस बार पृथ्वी पर और सिंह राशि में है। दो मार्च को शाम छह बजकर 22 मिनट से लेकर आठ बजकर 53 मिनट का समय प्रदोष काल रहेगा और इसी समय के दौरान होलिका दहन किया जाना शुभ और शास्त्र सम्मत होगा। ग्रहण के कारण इस बार रंगोत्सव या होली चार मार्च को खेली जाएगी।
दूसरे दिन तीन मार्च को चंद्रग्रहण है, जो भारत में दिखाई देगा, इसलिए इसका धार्मिक महत्व रहेगा। चंद्रग्रहण तीन मार्च मंगलवार को शाम छह बजकर 27 मिनट पर शुरू होगा और शाम छह बजकर 45 मिनट पर इसका समापन होगा। चंद्रोदय का समय छह बजकर 22 मिनट पर होगा और ग्रहण केवल 22 मिनट का होगा। शास्त्रों के अनुसार, चंद्रग्रहण का सूतक काल नौ घंटे पहले, यानी सुबह नौ बजकर 39 मिनट से शुरू हो जाएगा। सूतक काल के दौरान शुभ कार्य, पूजा-पाठ और हवन वर्जित रहेंगे। यह ग्रहण यूरोप, एशिया, उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका में भी देखा जा सकेगा।
नगर के प्रमुख मंदिर जैसे सनातन धर्म मंदिर, श्रीराम मंदिर, अचलेश्वर मंदिर, थाटीपुर स्थित द्वारिकाधीश मंदिर व पुराने जिला कोर्ट भवन के पास स्थित गिर्राज मंदिर में दो मार्च को प्रदोष काल में होलिका दहन करने का निर्णय लिया गया है। होलिका दहन के दूसरे दिन चंद्रग्रहण होने के कारण सुबह की आरती के बाद मंदिरों के पट बंद हो जाएंगे। चंद्रग्रहण की समाप्ति के बाद मंदिरों की शुद्धि और ठाकुरजी के दिव्य शृंगार के साथ पट पुनः खोले जाएंगे। वहीं सराफा बाजार एसोसिएशन के अध्यक्ष पुरुषोत्तम जैन ने बताया कि सराफा बाजार में शहर की सबसे बड़ी होलिका का दहन दो मार्च को रात नौ बजे किया जाएगा।
यह भी पढ़ें- इंदौर में अवैध निर्माण पर चला प्रशासन का बुलडोजर, 20 हजार वर्गफीट जमीन कराई मुक्त, गूगल सैटेलाइट इमेज से खुला राज