सिंधिया राजपरिवार के संपत्ति विवाद में 25 अगस्त को अहम सुनवाई, प्रतिमा देवी की आपत्ति पर कोर्ट में होगी बहस
पिछली सुनवाई में प्रतिमा देवी की ओर से यह आपत्ति उठाई गई थी कि उनकी मां पद्मावती राजे के संपत्ति संबंधी अधिकारों को ध्यान में रखे बिना परिवार के अन्य ...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 24 Aug 2026 10:54:50 PM (IST)Updated Date: Mon, 24 Aug 2026 11:01:58 PM (IST)
HighLights
- मां पद्मावती राजे के संपत्ति अधिकारों का दिया हवाला
- सिंधिया परिवार की ओर से दाखिल जवाबी आवेदनों पर तर्क
- प्रस्तावित समझौते पर कानूनी स्थिति होगी साफ
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। सिंधिया राजपरिवार की अरबों रुपये की पैतृक संपत्तियों के बंटवारे को लेकर चल रहे विवाद में मंगलवार (25 अगस्त) को होने वाली सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पिछली सुनवाई में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे की ओर से प्रतिमा देवी की आपत्ति के जवाब में आवेदन पेश किए गए थे। अब अदालत इन जवाबी आवेदनों और प्रतिमा देवी की ओर से उठाए गए अधिकार संबंधी सवालों पर विस्तार से सुनवाई करेगी। इसके बाद प्रस्तावित राजीनामे को आगे बढ़ाने की दिशा भी स्पष्ट हो सकती है।
पिछली सुनवाई में प्रतिमा देवी की ओर से यह आपत्ति उठाई गई थी कि उनकी मां पद्मावती राजे के संपत्ति संबंधी अधिकारों को ध्यान में रखे बिना परिवार के अन्य सदस्यों के बीच समझौते को अंतिम रूप नहीं दिया जा सकता। उनका कहना है कि उत्तराधिकारी होने के नाते उनके अधिकारों पर भी विचार किया जाना चाहिए। यही आपत्ति अब प्रस्तावित समझौते की राह में सबसे बड़ा कानूनी सवाल बन गई है।
जवाबी आवेदनों पर भी होगी बहस
मंगलवार की सुनवाई में सबसे पहले प्रतिमा देवी की आपत्ति और उसके जवाब में सिंधिया परिवार के सदस्यों की ओर से दाखिल आवेदनों पर पक्षकारों के तर्क सुने जा सकते हैं। वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे की ओर से दिए गए जवाब में यह सवाल उठाया गया है कि यदि प्रतिमा देवी ने पहले प्रस्तावित समझौते पर सहमति जताई थी और खुद को प्रक्रिया से अलग रखा था तो समझौते के अंतिम चरण में आपत्ति क्यों की गई?
जवाबी पक्ष की ओर से प्रतिमा देवी की आपत्ति को लेकर अदालत के समक्ष यह तर्क भी रखा जा सकता है कि उनकी ओर से की जा रही आपत्ति से वर्षों पुराने विवाद को समाप्त करने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। हालांकि अदालत सभी पक्षों को सुनने के बाद ही यह तय करेगी कि इस आपत्ति का समझौते पर क्या प्रभाव पड़ेगा?