राजा मानसिंह तोमर संगीत विवि में खुलेगा 'खयाल गायकी केंद्र', देशभर के गुरु तराशेंगे नई प्रतिभाएं
हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में खयाल गायकी मुख्य रूप से दो भागों में प्रस्तुत की जाती है- बड़ा खयाल और छोटा खयाल। दोनों का उद्देश्य राग को प्रस्तुत कर ...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 14 May 2026 02:27:12 PM (IST)Updated Date: Thu, 14 May 2026 02:28:14 PM (IST)
प्रतीकात्मक चित्र।HighLights
- ग्वालियर घराने की विरासत को तकनीक का साथ
- 150 महाविद्यालयों के छात्र ऑनलाइन सीखेंगे बारीकियां
- पंडित प्रभाकर लक्ष्मण गोहदकर को केंद्र होगा समर्पित
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय एक बड़ा नवाचार करने जा रहा है। प्रदेश के एकमात्र संगीत विश्वविद्यालय में जल्द ही 'खयाल गायकी केंद्र' की शुरुआत होगी। यह केंद्र न केवल पारंपरिक संगीत धरोहर के संरक्षण का माध्यम बनेगा, बल्कि आधुनिक तकनीक के जरिए विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराएगा। इस विश्वविद्यालय से संबद्ध प्रदेश भर के लगभग 150 महाविद्यालय के छात्र वर्चुअल माध्यम से कनेक्ट रहकर डिप्लोमा कर सकेंगे।
विश्वविद्यालय प्रबंधन का मानना है कि ग्वालियर घराने की ऐतिहासिक पहचान को नई ऊर्जा देने के लिए यह केंद्र महत्वपूर्ण साबित होगा। खास बात यह है कि यहां विश्वविद्यालय के नियमित विद्यार्थियों के साथ प्रदेशभर के बाहरी संगीत साधकों को भी प्रशिक्षण का अवसर दिया जाएगा। केंद्र में विद्यार्थियों को रागदारी, आलाप, तान, बंदिश, स्वर साधना और मंच प्रस्तुति की बारीकियों का अभ्यास कराया जाएगा। साथ ही तकनीक आधारित प्रशिक्षण से विद्यार्थी अपनी गायकी को रिकार्ड कर उसका विश्लेषण भी कर सकेंगे।
खयाल गायकी को समझें
हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में 'खयाल गायकी' को सबसे लोकप्रिय और अभिव्यक्तिपूर्ण शैली माना जाता है। 'खयाल' शब्द का अर्थ होता है 'कल्पना'। इस शैली में गायक राग के स्वरूप को अपनी कल्पनाशीलता, आलाप, तान और भाव के माध्यम से विस्तार देता है। हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में खयाल गायकी मुख्य रूप से दो भागों में प्रस्तुत की जाती है- बड़ा खयाल और छोटा खयाल। दोनों का उद्देश्य राग को प्रस्तुत करना होता है, लेकिन शैली और गति में अंतर होता है।
संगीत साधक गोहदकर के नाम पर होगा केंद्र
इस केंद्र का नामकरण हाल ही में दिवंगत हुए संगीत साधक पंडित प्रभाकर लक्ष्मण गोहदकर के नाम पर रखा जाएगा। उनका नाम विशेष रूप से ग्वालियर घराने की खयाल गायकी से जुड़ा रहा है। उन्होंने लंबे समय तक हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की साधना की और ग्वालियर की सांगीतिक विरासत को आगे बढ़ाने में योगदान दिया।
कुलसचिव की सुनिएं...
यह केंद्र शीघ्र की शुरू किए जाने की तैयारी है। यह ग्वालियर की ऐतिहासिक संगीत परंपरा को आधुनिक तकनीक से जोड़ने का काम करेगा। इससे युवा पीढ़ी में शास्त्रीय संगीत के प्रति रुचि बढ़ेगी और ग्वालियर एक बार फिर राष्ट्रीय संगीत मानचित्र पर मजबूत पहचान बना सकेगा। -अरुण चौहान, कुलसचिव, राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय