
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। यदि आपके पास व्यवसाय का कोई आइडिया है लेकिन लाखों रुपये की मशीनें और प्लांट लगाने का बजट नहीं है, तो अब चिंता की कोई बात नहीं। प्रदेश के किसानों, महिला उद्यमियों, स्टार्टअप एवं किसान-उत्पादक संगठनों के लिए राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय ग्वालियर एक योजना लेकर आया है।
इसमें विश्वविद्यालय परिसर स्थित सेंट्रल प्रोसेसिंग लाइन (सीपीएल) को बेहद किफायती दरों पर किराये पर दिया जाएगा, जहां लोग अपने कच्चे माल को प्रोसेस और पैक करके अपने ब्रांड नाम से बाजार में बेच सकेंगे। पहली प्राथमिकता सेंटर फॉर एग्रीबिजनेस इनक्यूबेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप (सीएआईई) में पंजीकृत उद्यमियों को दी जाएगी। अब तक 10 से 15 आवेदन आ चुके हैं।

(सेंट्रल प्रोसेसिंग लाइन की जानकारी लेते कृषि विश्वविद्यालय के कुलगुरु)
सीएआईई ने राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के सहयोग से पांच मशीनों को इंस्टॉल किया है। जिसका उद्देश्य कृषि उत्पादों में वैल्यू एडिशन को बढ़ावा देना और किसानों की आय बढ़ाना है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। साथ ही 'फार्म टू मार्केट' की कड़ी मजबूत होगी और एग्री स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा मिलेगा।
छोटे उद्यमियों के पास सबसे बड़ी चुनौती प्लांट की लागत होती है। नाबार्ड के सहयोग से हमने पांच प्रसंस्करण इकाइयां तैयार की हैं। उद्यमी कच्चा माल लाएं, प्रोसेसिंग से पैकेजिंग तक की सुविधा हम देंगे। सीएआइई से जुड़े सदस्यों को प्राथमिकता मिलेगी।- डॉ. वाइडी मिश्रा, नोडल अधिकारी
सीएआइईसीपीएल के जरिये किसान और स्टार्टअप बिना भारी निवेश के अपना ब्रांड बना सकेंगे। इससे कृषि उपज को बेहतर उपयोग, उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार और किसानों की आय में वृद्धि के नए अवसर विकसित होंगे।- डॉ. अरविंद कुमार शुक्ला, कुलगुरु, राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय