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नए माइनिंग अधिकारी की भूमिका पर सवाल, एमपी हाईकोर्ट ने सरकार से कहा- ऐसी छवि के अधिकारी को ईमानदार बताते हो

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने प्रभारी माइनिंग अधिकारी पंकज मिश्रा की भूमिका पर सवाल उठाए। कहा- शिकायतों वाले अधिकारी को ईमानदार बता रहे ह...और पढ़ें

By Vikram Singh TomarEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Wed, 12 Aug 2026 08:26:59 AM (IST)Updated Date: Wed, 12 Aug 2026 08:33:25 AM (IST)
नए माइनिंग अधिकारी की भूमिका पर सवाल, एमपी हाईकोर्ट ने सरकार से कहा- ऐसी छवि के अधिकारी को ईमानदार बताते हो
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ। - फाइल फोटो

HighLights

  1. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में अवैध खन-परिवहन याचिका पर सुनवाई हुई
  2. कोर्ट ने कलेक्टर रुचिका चौहान और प्रभारी माइनिंग अधिकारी पंकज मिश्रा से सवाल किए
  3. पूर्व और वर्तमान माइनिंग अधिकारियों की जांच कर दोषी पाए जाने पर FIR दर्ज करने के आदेश

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में चल रही अवैध खनन और परिवहन से जुड़ी याचिका में मंगलवार को सुनवाई हुई और ड्रोन रिकॉर्डिंग की फुटेज न्यायालय में चलाई गई। सुनवाई के दौरान जिला कलेक्टर रुचिका चौहान और प्रभारी माइनिंग अधिकारी पंकज मिश्रा मौजूद रहे। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कलेक्टर से पूछा कि क्या आप सक्षम हैं इसे रोकने के लिए?

कलेक्टर ने कहा कि हम पुलिस प्रशासन की सहायता से लगातार कार्रवाई कर रहे हैं। कोर्ट ने कलेक्टर से नए माइनिंग अधिकारी मिश्रा के बारे में पूछा कि इनके खिलाफ मामले और शिकायतें दर्ज हैं इसका पता है? कलेक्टर ने इसकी जानकारी न होने की बात कही। तभी परिवादी की ओर से एक वकील ने कोर्ट को बताया कि माइनिंग अधिकारी के खिलाफ कलेक्टर ने ही कुछ माह पूर्व जांच के आदेश दिए थे, इसके बाद कलेक्टर कोई जवाब नहीं दे सकीं।


दोषी पाए जाते हैं तो दोनों पर एफआईआर दर्ज हो

कोर्ट ने शासन से पूछा कि जिस माइनिंग अधिकारी के खिलाफ इतने मामले और शिकायतें दर्ज हैं ऐसे व्यक्ति को आप ईमानदार अफसर बता रहे हैं। कोर्ट ने ईओडब्ल्यू लोकायुक्त दोनों को पूर्व और वर्तमान माइनिंग अधिकारियों के खिलाफ जांच करने के आदेश दिए और कहा है कि अगर दोषी पाए जाते हैं तो दोनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए।

सुनवाई के दौरान कलेक्टर से फुटेज मे दिख रहे रास्तों के बारे में भी सवाल जवाब किए हालांकि उनका भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।कोर्ट ने पूछा कि सभी खदानों का निरीक्षण कर पूरा रिकार्ड पेश करने और अवैध परिवहन के रास्तों पर लगाम लगाने सहित संपूर्ण ब्यौरा पेश करने के लिए कितना समय चाहिए।

कलेक्टर ने 30 सितंबर का समय मांगा, कोर्ट ने कहा है कि 30 सितंबर तक पूरी जानकारी कलेक्टर को कोर्ट के समक्ष पेश करना होगी। इसके साथ कोर्ट ने कहा कि माइनिंग अधिकारी की जिम्मेदारी भी कलेक्टर को निभानी पड़ सकती है। सुनवाई के दौरान अशोक यादव की ओर से गिट्टी बेचने की अनुमति मांगी गई जिस पर कलेक्टर को पूरी जांच करने के निर्देश दिए हैं। इस मामले की सुनवाई बुधवार को भी होगी।

माइनिंग का पूरा रिकार्ड पेश होगा, कितना माल खुदा कितना शेष बताना होगा

इस मामले में वर्तमान प्रभारी माइनिंग अधिकारी को कोर्ट ने कहा है कि अब तक किसे कितनी जगह स्वीकृत हुई है, कितने समय के लिए इसकी जानकारी बुधवार को कोर्ट में देना होगी। इसके साथ ही कितनी खोदाई हो गई है कितना माल शेष बचा है इसकी जानकारी देना होगी। साथ ही यह भी बताया होगा कि कोई व्यक्ति अगर तय समय से पहले तय सीमा में खुदाई कर ले तो बाकी शेष समय में वह क्या करता है उसके लिए क्या नियम है। इसकी संपूर्ण जानकारी आज की सुनवाई में देना होगी।

ईओडब्ल्यू-लोकायुक्त और पांच आरटीओ मामले में बनाया पक्षकार

अवैध खनन और खनिज परिवहन से जुड़े मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने सख्त रुख अपनाते हुए आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) और एसपीई लोकायुक्त के महानिदेशक को मामले में पक्षकार बनाया है। साथ ही ग्वालियर, दतिया, मुरैना, भिंड और शिवपुरी के आरटीओ को भी प्रतिवादी बनाया गया है।

सुनवाई में राज्य की ओर से बताया गया कि घनश्याम यादव के खिलाफ ईओडब्ल्यू में दो शिकायतें जांच के अधीन हैं, जबकि दो अन्य शिकायतों की लोकायुक्त द्वारा जांच पूरी कर एफआईआर के लिए निष्कर्ष भोपाल भेजा गया है।

360 डिग्री सीसीटीवी कैमरे लगाने का सुझाव

प्रभारी खनन अधिकारी पंकजध्वज मिश्रा के खिलाफ भी आय से अधिक संपत्ति की शिकायत लंबित होने की जानकारी दी गई। सुनवाई में खनन क्षेत्रों से खनिज की मात्रा की निगरानी के लिए धर्मकांटे लगाने, उन्हें ई-चालान और ई-खनिज पोर्टल से जोड़ने तथा 360 डिग्री सीसीटीवी और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन कैमरे लगाने के सुझाव दिए गए।

कोर्ट ने इस बात पर आश्चर्य जताया कि फिलहाल किसी भी स्थान पर धर्मकांटा नहीं है। कोर्ट ने डंपरों के नंबर कैबिन और बॉडी पर स्पष्ट रूप से अंकित रखने तथा निर्धारित ईटीपी मार्ग से ही परिवहन सुनिश्चित करने की बात कही।

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