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एमपी हाईकोर्ट ने कहा- कोई जानबूझकर जानकारी छिपाता है, तो यह भी अपराध की श्रेणी में आ सकता है

MP High Court: लापता युवक को बरामद करने की याचिका पर एमपी हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने कहा, जो पुलिस को जानकारी देने के लिए बाध्य है और जानबूझकर छिप...और पढ़ें

By Vikram Singh TomarEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Wed, 12 Aug 2026 11:21:23 AM (IST)Updated Date: Wed, 12 Aug 2026 11:58:21 AM (IST)
एमपी हाईकोर्ट ने कहा- कोई जानबूझकर जानकारी छिपाता है, तो यह भी अपराध की श्रेणी में आ सकता है
एमपी हाईकोर्ट ने की सख्त टिप्पणी। - प्रतीकात्मक तस्वीर

HighLights

  1. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने सख्त टिप्पणी की
  2. कोर्ट को बताया गया- प्रतिवादी को लापता युवक के ठिकाने की जानकारी है
  3. युवक उसका पोता है, लेकिन वह पुलिस के साथ सहयोग नहीं कर रहा है

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। लापता युवक को बरामद कर हाई कोर्ट के समक्ष पेश करने की मांग को लेकर दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति पुलिस को जरूरी जानकारी देने के लिए बाध्य है और जानबूझकर जानकारी छिपाता है तो उसका यह कृत्य भी अपराध की श्रेणी में आ सकता है।

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ में न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की पीठ ने यह टिप्पणी 11 अगस्त 2026 को राधा प्रजापति की याचिका की सुनवाई के दौरान की। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि इस मामले के प्रतिवादी को लापता युवक के ठिकाने की जानकारी है। युवक उसका पोता है, लेकिन वह पुलिस के साथ सहयोग नहीं कर रहा है।


वहीं प्रतिवादी की ओर से अधिवक्ता ने इसका विरोध करते हुए कहा कि याचिका में कई महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया गया है। उनके अनुसार प्रतिवादी द्वारा पहले ही गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी और पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उस युवती के बयान भी दर्ज किए हैं, जिसके साथ युवक रह रहा है।

बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका का रूप दिया गया

प्रतिवादी की ओर से यह भी कहा गया कि वास्तविक विवाद वैवाहिक प्रकृति का है, जिसे बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका का रूप दे दिया गया है। हालांकि, प्रतिवादी ने युवक के वर्तमान ठिकाने की जानकारी होने से मना किया। कोर्ट ने कहा कि प्रतिवादी को युवक के ठिकाने की जानकारी है या नहीं और वह पुलिस से सहयोग कर रहा है या नहीं, इस पर युवक के बरामद होने के बाद विचार किया जाएगा।

सरकार की ओर से बताया गया कि मिले सुराग के आधार पर पुलिस टीम उस शहर के लिए रवाना हो चुकी है, जहां युवक के होने की जानकारी मिली है। पुलिस को उम्मीद है कि तीन दिन के भीतर युवक को बरामद कर कोर्ट के समक्ष पेश कर दिया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 14 अगस्त 2026 को होगी।

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