
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। बहोड़ापुर थाना क्षेत्र में वर्ष 2019 में 85 वर्षीय बुजुर्ग महिला जुग्गो बाई की निर्मम हत्या और लूट के बहुचर्चित मामले में विशेष न्यायालय (एट्रोसिटीज) ग्वालियर ने अहम फैसला सुनाया है। न्यायालय ने आरोपित भूरा उर्फ काले खां को हत्या, डकैती और गृह अतिचार का दोषी मानते हुए आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।
यह फैसला विशेष न्यायाधीश ऋतुराज सिंह चौहान द्वारा सुनाया गया। शासन की ओर से इस मामले की पैरवी विशेष लोक अभियोजक दिनेश सिंह चौहान ने की।
फरियादी धर्मेन्द्र खटीक ने थाना बहोड़ापुर में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उनकी मां जुग्गो बाई चलने-फिरने में असमर्थ थीं और घर के निचले कमरे में सोती थीं। 12-13 सितंबर 2019 की रात अज्ञात आरोपितों ने घर में घुसकर उनकी हत्या कर दी।
सुबह जब स्वजन कमरे में पहुंचे तो देखा कि जुग्गो बाई मृत अवस्था में पड़ी थीं। गले में कपड़े का फंदा लगा था और दोनों पैरों के पंजे कटे हुए थे। पैरों में पहने चांदी के कड़े गायब थे। घटना की सूचना तत्काल 100 डायल पर दी गई। इसके बाद पुलिस ने डकैती और अपहरण प्रभावित क्षेत्र अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया।
जांच के दौरान पुलिस ने आरोपित भूरा उर्फ काले खां को गिरफ्तार किया। पूछताछ में उसने बताया कि उसने अपने साथी जमाल उर्फ करूआ खां के साथ मिलकर वारदात की। आरोपित के बताने पर पुलिस ने जौरा स्थित सुनार पवन सिंघल की दुकान से चांदी का एक कड़ा जब्त किया, जबकि दूसरा कड़ा सह आरोपित जमाल उर्फ करूआ के घर से जमीन खोदकर बरामद किया गया।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यह हत्या लूट के इरादे से की गई थी और बुजुर्ग महिला के साथ अत्यंत क्रूरता बरती गई। अपराध की गंभीरता को देखते हुए आरोपित के प्रति किसी भी प्रकार की नरमी बरतना उचित नहीं है। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि मध्यप्रदेश डकैती व व्यपहरण प्रभावित क्षेत्र अधिनियम के अंतर्गत अलग से सजा देने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि हत्या की धारा पहले से ही इस अधिनियम में शामिल है।
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विशेष न्यायालय ने आरोपित भूरा उर्फ काले खां को हत्या के अपराध में आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई। वहीं इस मामले में सह आरोपित जमाल उर्फ करूआ खां के फरार होने के कारण जब्त किए गए चांदी के कड़ों के संबंध में फिलहाल कोई आदेश पारित नहीं किया गया है।