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सेहत से खिलवाड़ का खतरा, पान मसाला की जांच में विभाग सुस्त; शिकायत मिले तो ही होती है सैंपलिंग

ग्वालियर में पान मसाला की गुणवत्ता जांच को लेकर खाद्य सुरक्षा विभाग की निगरानी पर सवाल उठे हैं। नियमित सैंपलिंग नहीं होने से मिलावट और मानकों की जांच ...और पढ़ें

By Varun SharmaEdited By: Anurag Mishra
Publish Date: Thu, 01 Oct 2026 02:10:45 PM (IST)Updated Date: Thu, 01 Oct 2026 02:10:45 PM (IST)
सेहत से खिलवाड़ का खतरा, पान मसाला की जांच में विभाग सुस्त; शिकायत मिले तो ही होती है सैंपलिंग
पान मसाला की जांच में विभाग सुस्त। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. पान मसाला की नियमित सैंपलिंग नहीं होने से सवाल उठे।
  2. खाद्य सुरक्षा विभाग के पास सैंपलिंग का निर्धारित शेड्यूल नहीं।
  3. महीने में कभी तीन-चार, कभी पांच-सात सैंपल लिए।

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर: बाजारों में सड़क-गलियों पर बिकने वाले पान मसाला के भीतर निर्माण करने वाले क्या मिला रहे हैं, मानकों का पालन हो रहा या नहीं, यह कुछ भी पता नहीं है। खाद्य सुरक्षा विभाग की प्राथमिकता में यह शामिल ही नहीं है क्योंकि पान मसाला को लेकर कितने सैंपल हुए यह आंकड़ा ही नहीं है। सालभर खाद्य पदार्थों के सैंपल लेने वाला खाद्य सुरक्षा विभाग पान मसाला के इतने भी सैंपल नहीं लेता कि गिनती हो जाए।

स्वास्थ्य के लिए खतरनाक और इसमें भी अगर मिलावट तो और अधिक सेहत से खिलवाड़ का मामला है, ऐसे में इन पदार्थों का सैंपल सबसे ज्यादा जरूरी है। विभाग के अनुसार कुछ समय पहले सैंपल लिए गए थे लेकिन सैंपलिंग के बाद क्या हुआ इसकी कोई जानकारी नहीं है।


ये है पूरा मामला

बता दें कि ग्वालियर और आसपास के जिलों में पान मसाला का कारोबार होता है, छोटे तौर पर उत्पादन और इसके अलावा बाहर से माल भी आता है। जिले में जिन यूनिटों में उत्पादन हो रहा है वहां भी खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमें नहीं पहुंचती हैं, यही कारण है कि पान मसाला के कारोबार में सेहत के लिहाज से मानकों पर सामग्री शामिल है या नहीं, यह सैंपलिंग के बाद ही पता चलता है। जब यह विभाग की राडार पर ही नहीं होता तो कारोबारी भी इसको लेकर चिंता में नहीं रहते हैं। खाद्य सुरक्षा टीम को यूनिट से लेकर बाजारों में बिकने वाले सैंपल लेने का पूरा अधिकार है।

सुपारी की क्वालिटी को लेकर पहले हुई थीं जांच

ग्वालियर में पहले पान मसालों की यूनिट पर हुई जांच में सुपारी की क्वालिटी पर सवाल उठ चुके हैं, इसमें सामने आया था कि सुपारी के साथ घटिया मटेरियल भी मिलाया जा रहा था। वहीं मानकों का मौके पर पालन भी नहीं मिला था।

महीने में पान मसालों के सैंपल का आंकड़ा न के बराबर

खाद्य सुरक्षा विभाग के अनुसार ही आंकड़े देखे गए तो पता चला कि पान मसाला को लेकर सैंपलिंग का कोई शेडयूल नहीं है, महीने में जहां खाद्य पदार्थाें के ढ़ेरों सैंपल लिए जाते हैं और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों पर टारगेट रहते हैं, इनमें पान मसाला नहीं होता है। कभी महीने में तीन चार सैंपल तो कभी पांच सात इससे ज्यादा सैंपल नहीं होते हैं। यह सैंपल भी पहले से तय नहीं होते हैं अगर शिकायत आ जाती है तो सैंपलिंग होती है।

कई मसालों के ठिकाने नहीं, इसलिए सैंपल भी नहीं

शहर में कई पान मसाले ऐसे बिकते हैं जिनका कोई ठिकाना नहीं मिलता है। सैंपलिंग लेने के लिए प्रतिष्ठान, यूनिट के प्रतिनिधियों का होना भी जरूरी होता है ऐसे में जो पान मसाला ठेलों या गलियों में अस्थाई ठिकानों पर बिकता है उसका तो सैंपल भी नहीं हो पाता है। आमतौर पर थोड़ी थोड़ी मात्रा में पान मसाला कई जगह बिकता है यही कारण है कि इसकी सैंपलिंग में भी परेशानी आती है।

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