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बदलेगी देश के खेतों की सूरत: मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए 27 राज्यों की बनेगी 'सॉइल हेल्थ पॉलिसी', मप्र समेत 5 राज्यों का रोडमैप तैयार

वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए मिट्टी के विभिन्न गुणों और मृदा स्वास्थ्य मानकों में कितना सुधार आवश्यक होगा, इसके लिए विज्ञा...और पढ़ें

By Anil TomarEdited By: Rajdil Shivhare
Publish Date: Thu, 02 Jul 2026 03:22:21 PM (IST)Updated Date: Thu, 02 Jul 2026 03:23:05 PM (IST)
बदलेगी देश के खेतों की सूरत: मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए 27 राज्यों की बनेगी 'सॉइल हेल्थ पॉलिसी', मप्र समेत 5 राज्यों का रोडमैप तैयार
सोशल मीडिया

HighLights

  1. भोपाल में कृषि विज्ञानियों का महामंथन
  2. हर जिले की मिट्टी के हिसाब से नीति
  3. निगरानी के लिए बनेगा स्पेशल सेल

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। देश की मिट्टी को अधिक उपजाऊ, टिकाऊ और जलवायु परिवर्तन के अनुकूल बनाने की दिशा में पहल शुरू हो गई है। 27 राज्यों के लिए उनकी भौगोलिक और कृषि परिस्थितियों के अनुरूप रीजनल साइल हेल्थ पालिसी तैयार की जा रही है।

इसी क्रम में मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात और गोवा की क्षेत्रीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए भोपाल में कृषि विज्ञानियों, किसानों, गैर-सरकारी संगठनों और कृषि विभाग के अधिकारियों ने विस्तृत मंथन कर नीति का प्रारूप तैयार किया।

विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से हुई चर्चा

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक डॉक्टर एमएल जाट द्वारा डॉ. आरएस परोदा की अध्यक्षता में भारत साइल हेल्थ पॉलिसी समिति का गठन किया गया है। इसके तहत भोपाल में आयोजित बैठक में आईसीएआर के उप-महानिदेशक (प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन) डॉ. अमरेश कुमार नायक की अध्यक्षता में विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई।


बैठक में राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. अरविंद कुमार शुक्ला को विशेष विशेषज्ञ के रूप में आमंत्रित किया गया। इसमें इस बात पर सहमति बनी कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए मिट्टी के विभिन्न गुणों और मृदा स्वास्थ्य मानकों में कितना सुधार आवश्यक होगा, इसके लिए विज्ञानी रूप से लक्ष्य निर्धारित किए जाएंगे। साथ ही भावी पीढ़ियों के लिए मिट्टी की उर्वरता और गुणवत्ता सुरक्षित रखने की व्यापक रणनीति भी तैयार की गई। बैठक में सेफ साइल ग्रुप, आइएफडीसी, राज्य कृषि विभाग, एनजीओ, एपीओ और विभिन्न कृषि विशेषज्ञों ने भाग लिया।

हर राज्य और जिले के अनुसार बनेगी नीति

कुलगुरु ने बताया कि भारत साइल हेल्थ पॉलिसी राज्य और जिले की मिट्टी, जलवायु और कृषि पद्धतियों के अनुरूप तैयार की जाएगी। इससे स्थानीय स्तर पर मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने, पोषक तत्वों के संतुलन और दीर्घकालीन कृषि उत्पादकता बढ़ाने की प्रभावी रणनीति बनाई जा सकेगी।

निगरानी के लिए विशेष सेल

नीति के प्रभावी क्रियान्वयन और निगरानी के लिए एक विशेष मानिटरिंग सेल गठित की गई है। इसमें भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. एमएल जाट, संबंधित राज्यों के कृषि सचिव और कृषि विश्वविद्यालयों के कुलगुरु शामिल रहेंगे। यह सेल नीति के क्रियान्वयन और समय-समय पर उसके मूल्यांकन की जिम्मेदारी निभाएगी।

इन बिंदुओं पर होगा मिट्टी की सेहत का आंकलन

  • विभिन्न क्षेत्रों की मिट्टी की बनावट और मौसम का मृदा उर्वरता पर प्रभाव।
  • जनजातीय क्षेत्रों की पारंपरिक कृषि पद्धतियों का संरक्षण और विज्ञानी समावेश।
  • पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलन को बढ़ावा।
  • फसल चक्र और विविध खेती के आधार पर मिट्टी की पोषक क्षमता का मूल्यांकन।
  • मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने और दीर्घकालीन उत्पादकता बढ़ाने के उपायों को प्राथमिकता।