बालिग होते ही प्रेमी के लिए परिवार से भिड़ी युवती, कोर्ट में खुद को 'झूठा' बताकर रेप केस से कराया मुक्त
यह मामला तीन वर्ष पहले बहोड़ापुर थाने में दर्ज हुआ था। जहां आरोपित युवक पर एक नाबालिग छात्रा के अपहरण कर उसे बंधक बनाकर रखने का आरोप लगाया गया। बाद मे ...और पढ़ें
Publish Date: Fri, 15 May 2026 10:01:37 AM (IST)Updated Date: Fri, 15 May 2026 10:17:27 AM (IST)
प्रतीकात्मक चित्र।HighLights
- फिल्मी लव स्टोरी की तरह ग्वालियर के बहोड़ापुर क्षेत्र का मामला
- वकील के पास खुद पहुंची लड़की; कहा-'मेरे प्रेमी ने कुछ नहीं किया, मुझे उसे बचाना है'
- परिवार का भारी विरोध, डांट फटकार के साथ प्रताड़ना का भी करना पड़ा सामना
नईदुनिया प्रतिनिधि,ग्वालियर। शहर के बहोड़ापुर क्षेत्र में तीन वर्ष पहले एक ऐसा मामला सामने आया जो पूरी तरह से फिल्मी था। जहां नाबालिग लडकी ने परिवार के दबाव में आकर पहले अपने प्रेमी पर दुष्कर्म का मामला दर्ज करवाया और जब वह बालिग हो गई तो पूरे परिवार के खिलाफ जाकर उस युवक से हाईकोर्ट मे समझौता कर उसे मामले से मुक्त करवा दिया।
इस मामले में सबसे रोचक बात यह रही कि मामले में पीडिता की ओर से पैरवी करने वाले अधिवक्ता के पास पहुंचकर युवती ने स्वयं इस मामले को खत्म करवाने की मांग की। प्रेम और भावनाओं का सम्मान करने वाले इस मुकदमे को अधिवक्ता प्रशांत चौहान ने अपना यादगार मुकदमा बताया।
ऐसे समझें मामला
यह मामला तीन वर्ष पहले बहोड़ापुर थाने में दर्ज हुआ था। जहां आरोपित युवक पर एक नाबालिग छात्रा के अपहरण कर उसे बंधक बनाकर रखने का आरोप लगाया गया। बाद में इन आरोपों में दुष्कर्म का की धारा पाक्सो भी जुड़वा दी गई । कहा गया कि छात्रा अपने घर से पड़ाव स्थित कोचिंग पढ़ने आई थी लेकिन उसे आरोपित युवक अपने साथ बंधक बनाकर ले गया। आरोपित ने उसे अपने निवास पर ही रखा, बाद में उसे छोड़ दिया। छूट कर युवती ने अपने परिवार को मामले के बारे में जानकारी दी और फिर जाकर पुलिस थाने में मामला दर्ज करवाया, जिसके बाद मामला न्यायिक प्रक्रिया में शामिल हुआ।
बालिग हुई तो पहुंची प्रेमी को बचाने
इस मामले में युवती नाबालिग थी और परिवार के दबाव में उसने शिकायत भी दर्ज करवाई। युवक को कोर्ट में ट्राइल फेस करना पड़ी। युवती जैसे ही बालिग तो हुई उसने तय कर लिया कि युवक को उन झूठे आरोपों से मुक्त करवाना है।
अधिवक्ता प्रशांत बताते हैं कि युवती उनके पास आई और कहा कि वह युवक जो झूठे आरोपों में फंसा हुआ है, वह इस मामले में राजीनामे के आधार पर मामले को खत्म करना चाहती है। युवती ने कोर्ट के समक्ष राजीनामा किए जाने की बात स्वीकार की और बताया कि उसने परिवार के दबाव में आकर युवक के खिलाफ झूठे आरोप लगाए थे। युवक ने ऐसा कुछ भी नहीं किया है। कोर्ट ने उसकी गवाही को माना और युवक को राहत दे दी।
परिवार ने किया विवाद: इस राजीनामा के बारे में युवती ने अपने परिवार को भनक भी नहीं लगने दी थी। युवती चुपके से तय तारीख पर आई और युवक के खिलाफ लगाए गए आरोपों की स्थिति स्पष्ट कर दी। वहीं जब परिवार को पता चला तो उन्होंने जमकर विवाद किया, युवती को डांट फटकार के साथ प्रताड़ना का भी सामना करना पड़ा।