व्यापम घोटाला: फर्जी परीक्षार्थी और असली अभ्यर्थी को 3-3 साल की जेल, CBI कोर्ट का बड़ा फैसला
सीबीआई/व्यापम कोर्ट ने आरोपी अमितेष कुमार और विपिन कुमार पर अलग-अलग धाराओं में 1-1 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
Publish Date: Thu, 13 Aug 2026 08:49:00 AM (IST)Updated Date: Thu, 13 Aug 2026 08:49:24 AM (IST)
HighLights
- 2013 पुलिस भर्ती परीक्षा में साल्वर कांड
- ई-मेल और लिखावट से बेनकाब हुई साजिश
- फॉरेंसिक और सीएफएसएल जांच बनी अहम आधार
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। वर्ष 2013 की पुलिस भर्ती परीक्षा में अभ्यर्थी के स्थान पर सॉल्वर बैठाने के मामले में ग्वालियर की विशेष सीबीआई/व्यापम अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश सीबीआई/व्यापम व अष्टम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विशाल अखंड ने आरोपी अमितेष कुमार और विपिन कुमार को आपराधिक षड्यंत्र, प्रतिरूपण कर छल, कूटरचना और मान्यता प्राप्त परीक्षा में अनुचित साधन के इस्तेमाल के अपराध में दोषी ठहराते हुए तीन वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोनों पर अलग-अलग धाराओं में एक-एक हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
मामला है नौ मार्च 2014 का
मामला नौ मार्च 2014 का है। गुना के शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में पुलिस भर्ती परीक्षा आयोजित हो रही थी। परीक्षा की दोपहर पाली में रोल नंबर 232847 के अभ्यर्थी विपिन कुमार के स्थान पर एक संदिग्ध युवक परीक्षा देने पहुंचा। वीक्षकों को उसके फोटो, पहचान पत्र, रासा और अन्य परीक्षा संबंधी दस्तावेजों में फोटो का मिलान नहीं मिला। संदिग्ध युवक को परीक्षा कक्ष में प्रवेश करने से पहले ही रोक लिया गया। पूछताछ में उसने अपना नाम अमितेष राजपूत बताया। इसके बाद केंद्राध्यक्ष डॉ. सुमन श्रीवास्तव की शिकायत पर कैंट थाना गुना में अपराध दर्ज किया गया।
ऑनलाइन फार्म से खुली साजिश की कड़ी
मामले की जांच में सीबीआई को महत्वपूर्ण दस्तावेजी साक्ष्य मिले। अदालत ने पाया कि विपिन कुमार के नाम से भरे गए ऑनलाइन आवेदन में अमितेष की ई-मेल आईडी का इस्तेमाल हुआ था। उसी आवेदन क्रमांक से जारी प्रवेश पत्र के साथ अमितेष परीक्षा केंद्र पर पहुंचा था। अदालत ने माना कि यह परिस्थितियां दोनों आरोपियों के बीच परीक्षा में सॉल्वर बैठाने की साजिश की महत्वपूर्ण कड़ी हैं।
अदालत के अनुसार, अमितेष परीक्षा केंद्र पर विपिन के रूप में उपस्थित हुआ था और परीक्षा देने का प्रयास किया, लेकिन परीक्षा कक्ष में जाने से पहले ही पकड़ा गया। होटल जगत के रजिस्टर में भी विपिन कुमार के नाम से ठहरने की एंट्री मिली थी। फोरेंसिक जांच में रजिस्टर की संबंधित प्रविष्टियों की लिखावट अमितेष कुमार की पाई गई।
फोटो और हस्ताक्षर की जांच भी अहम रही
मामले में राज्य न्यायिक विज्ञान प्रयोगशाला सागर की रिपोर्ट भी पेश की गई। जांच में विपिन कुमार के प्रवेश पत्र और पहचान संबंधी फोटो की तुलना अमितेष के फोटो से की गई। वैज्ञानिक परीक्षण में दोनों को एक ही व्यक्ति होने की पुष्टि नहीं हुई। वहीं सीएफएसएल नई दिल्ली की हैंडराइटिंग जांच में संबंधित दस्तावेजों की लिखावट अमितेष कुमार की पाई गई और यह भी सामने आया कि वे विपिन कुमार की लिखावट नहीं थीं।