• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • कोरोना वायरस
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • रक्षाबंधन
  • सावन माह
  • मानसून
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • राशि परिवर्तन
  • वास्‍तु शास्‍त्र
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • इंदौर

इंदौर में 6 हजार प्लॉट धारक बेहाल, ₹5.89 करोड़ जमा कराने के बाद भी स्कीम 171 से 32 साल से राहत का इंतजार, जांच फिर शुरू

इंदौर विकास प्राधिकरण (आइडीए) की स्कीम 171 में शामिल 13 सोसायटियों को योजना से बाहर करने की प्रक्रिया एक बार फिर जांच के दौर में पहुंच गई है।

By prem jatEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Sun, 23 Aug 2026 10:44:49 PM (IST)Updated Date: Sun, 23 Aug 2026 10:44:49 PM (IST)
इंदौर में 6 हजार प्लॉट धारक बेहाल, ₹5.89 करोड़ जमा कराने के बाद भी स्कीम 171 से 32 साल से राहत का इंतजार, जांच फिर शुरू
32 वर्षों से अटका 13 सोसायटियों की मुक्ति का मामला।

HighLights

  1. 32 वर्षों से अटका 13 सोसायटियों की मुक्ति का मामला
  2. राशि जमा होने के बाद भी 2 साल से अटकी प्रक्रिया
  3. स्कीम 171 से मुक्त नहीं हो पा रहीं 13 सोसायटियां

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर विकास प्राधिकरण (आइडीए) की स्कीम 171 में शामिल 13 सोसायटियों को योजना से बाहर करने की प्रक्रिया एक बार फिर जांच के दौर में पहुंच गई है। इन सोसायटियों और अन्य कॉलोनियों की ओर से स्कीम से मुक्ति के लिए दिसंबर 2024 में ही आइडीए के पास 5.89 करोड़ रुपए जमा कराए जा चुके हैं। इसके बावजूद अब तक उन्हें स्कीम से मुक्त नहीं किया गया है। करीब 6 हजार प्लॉट धारक 32 वर्षो से इस मामले में राहत का इंतजार कर रहे हैं।

चार संस्थाओं का ऑडिट ही समय पर हुआ

दरअसल, कलेक्टर शिवम वर्मा ने 13 सोसायटियों की की जांच की जिम्मेदारी अपर कलेक्टर नवजीवन विजय पंवार को सौंपी है। अपर कलेक्टर द्वारा बीते सप्ताह कलेक्टोरेट में सभी संबंधित सोसायटियों के अध्यक्षों और प्रशासकों की बैठक ली गई। बैठक में सामने आया कि अधिकांश सोसायटियों का ऑडिट कई वर्षों से लंबित है। केवल चार संस्थाओं का ऑडिट ही समय पर हुआ है। इसे गंभीरता से लेते हुए शेष नो सोसायटियों को सात दिन में ऑडिट पूरा कराने के निर्देश दिए गए हैं।


जांच के दौरान सोसायटियों के सदस्यों की वरिष्ठता सूची भी अपडेट करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके आधार पर यह भी देखा जाएगा कि संबंधित सोसायटियों में सदस्यता और प्लॉट आवंटन की स्थिति क्या है। अपर कलेक्टर नवजीवन पंवार का कहना है कि संस्थाओं का सात दिन में ऑडिट पूरा करने के निर्देश दिए गए है। वहीं लगातार समीक्षा भी की जाएगी।

सहकारिता विभाग के अधिकारियों को नोटिस

कई सोसायटियों में प्रशासक नियुक्त होने के बावजूद वर्षो से ऑडिट नहीं कराया गया, जबकि प्रत्येक वर्ष ऑडिट कराया जाना चाहिए। ऑडिट कराने की जिम्मेदारी सहकारिता विभाग के अधिकारियों की होती है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अपर कलेक्टर नवजीवन पंवार ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए है।

इन सोसायटियों की जांच

स्कीम 171 में शामिल प्रमुख सोसायटियों में देवी अहिल्या श्रमिक कामगार संस्था, न्याय विभाग कर्मचारी संस्था, इंदौर विकास गृह निर्माण, मजदूर पंचायत, लक्ष्मण नगर गृह निर्माण, सूर्या गृह निर्माण और मारुति गृह निर्माण सहित 13 संस्थाएं शामिल हैं। इनमें कई संस्थाओं का ऑडिट वर्ष 2007-08 से लेकर 2023-24 तक ही हुआ है, जबकि मारुति गृह निर्माण, श्रीकृपा गृह निर्माण, अप्सरा गृह निर्माण, सन्नी गृह निर्माण संस्था का ऑडिट 2024-25 तक पूरा है। इसमें संजना गृह निर्माण का ऑडिट तो 2017-18 तक ही हुआ है।

यह भी पढ़ें- एमपी के 227 नगरीय निकायों में 602 एल्डरमैन नियुक्त, नगरीय विकास को मिलेगी गति, अधिसूचना जारी

राशि जमा, फिर भी नहीं मिली राहत

स्कीम 171 में 13 सोसायटियों के अलावा अन्य कॉलोनियां शामिल है, लेकिन आईडी ने योजना घोषित करने के बावजूद यहां पर विकास कार्य नहीं किए। दस साल से अधिक तक किसी योजना में विकास कार्य नहीं करने पर जमीनों को योजना से बाहर करने का प्राविधान है, लेकिन योजना में शामिल जमीनों को अब तक मुक्त नहीं किया गया। इसलिए यहां के प्लॉट धारक निर्माण कार्य नहीं कर पा रहे है। आइडीए ने योजना से सोसायटियों और कॉलोनियों को मुक्त करने के लिए विकास शुल्क जमा कराया था। इसके बावजूद दो साल से प्रक्रिया अटकी हुई है।