
नईदुनिया प्रतिनिधि,इंदौर। इंदौर के मुख्य स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी (सीएमएचओ) माधव हासानी पर फर्जी अनुमति से संचालिक अस्पतालों के मुद्दे पर हाईकोर्ट को गलत जानकारी देने करने के आरोप लगे हैं। ये आरोप इंदौर में फर्जी अनुमति के संचालित हो रहे अस्पतालों के मामले में दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट में लगे। याचिकाकर्ता अभिभाषक चर्चित शास्त्री ने कोर्ट को बताया कि सीएमएचओ जिन अस्पतालों की सील बता रहे हैं उनमें मैं इलाज करवाकर आया हूं। कोर्ट में उन अस्पतालों में कराए गए इलाज के कागज भी पेश किए।
बगैर बिल्डिंग परमिशन, बगैर फायर एनओसी सहित अन्य आवश्यक दस्तावेजों के शहर में 31 अस्पताल संचालित किए जा रहे हैं। अभिभाषक चर्चित शास्त्री ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। साथ ही इसमें स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत का भी आरोप लगाया गया है।
हाईकोर्ट में गुरुवार को इस मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट को बताया गया कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से 600 पन्नों का जो जवाब हाईकोर्ट में पेश किया गया है, उसमें सीएमएचओ हासानी ने 34 अस्पतालों की जांच रिपोर्ट न्यायालय में पेश की है। जिसमे 1 विनायक पैथोलाजी लेब व लेडी हलीमा नामक अस्पताल को सील करने का आदेश और कार्रवाई के दस्तावेज भी लगाए गए हैं। लेकिन ये अस्पताल अभी भी काम कर रहे हैं।
उन्होंने इस दौरान कोर्ट में कार्रवाई के बाद उक्त पैथोलाजी लेब में कराए गई खून की जांच के दस्तावेजों के साथ ही अस्पताल में इलाज की पर्ची भी कोर्ट के समक्ष रखी। उन्होंने भरी कोर्ट में सीएमएचओ पर आरोप लगाया कि, सीएमएचओ डा. हासानी ने न सिर्फ कोर्ट में गलत जानकारी पेश की।
बल्कि कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश भी की है। इसके अलावा उन्होंने कोर्ट में स्वास्थ्य विभाग की ओर से पेश किए गए दस्तावेजों में से 6 की जानकारी रखते हुए कोर्ट को बताया कि इसमें नगर निगम के शपथ पत्र पर अपर आयुक्त के हस्ताक्षर वाले फर्जी भवन अनुमति प्रमाण पत्र भी कोर्ट में पेश किए गए हैं। नगर निगम ने अपने जवाब में खुद इन अस्पतालों को किसी तरह की अनुमति देने से इंकार किया है। उसके बावजूद उनकी अनुमति के दस्तावेज रखे गए हैं।
सुनवाई में मौजूद नगर निगम के वकील ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने अपनी ओर से जवाब पहले ही पेश कर दिया है, जिसमें हमारे द्वारा भवन अनुमति, फायर एनओसी सहित अन्य दस्तावेजों की स्थिति को पहले ही साफ कर दिया गया है। वहीं कोर्ट ने पूछा कि पिछली सुनवाई पर याचिकाकर्ता को प्रति उत्तर पेश करने के लिए कहा गया था।
अभी तक इस पर प्रति उत्तर पेश नहीं हुआ है। इस पर याचिकाकर्ता की ओर से बहस करने के लिए अनुमति मांगी। हालांकि कोर्ट ने उन्हें लिखित में प्रति उत्तर पेश करने और उसके बाद बहस करने की बात करते हुए 27 जुलाई तक का समय दिया है। तब तक याचिकाकर्ता को प्रति उत्तर कोर्ट में पेश करना होगा।
याचिका दायर करने वाले वकील शास्त्री ने इस दौरान कोर्ट में अपनी जान को खतरा होने का अंदेशा जताया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि, 16 जून को उनको आरएनटी मार्ग स्थित उनके ऑफिस की बिल्डिंग के बाहर दो नकाबपोश लोगों ने उन्हें घेरने की कोशिश की थी। वे बड़ी मुश्किल से हाईकोर्ट पहुंचे थे और यहां से तुकोगंज थाने पर पहुंचकर उन्होंने लिखित शिकायत भी की थी। जिसके बाद पुलिस ने सीसीटीवी कैमरों में फुटेज देखकर घटना की पुष्टी करते हुए एफआईआर दर्ज की थी। उन्होंने एफआईआर की प्रति भी हाईकोर्ट के समक्ष पेश की। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि उनको लगातार अलग-अलग नंबरों से धमकियां भी मिल रही है। जिसकी शिकायत भी वो पुलिस को कर चुके हैं। इस पर कोर्ट ने सरकारी वकील से उन पर हमले की जांच की स्थिति की जानकारी मांगी। जिस पर सरकारी वकील ने कोर्ट से इसकी जानकारी लेने की बात कही। इस दौरान कोर्ट ने मौखिक तौर पर सरकार को निर्देश जारी करते हुए याचिकाकर्ता की सुरक्षा की व्यवस्था करने के लिए निर्देश भी जारी किए हैं।