30 साल की बेदाग सेवा के बाद वेतनवृद्धि रोकी तो कर्मचारी पहुंचा हाई कोर्ट, कलेक्टर से पूछा गया जांच किए बिना सजा कैसे दी
शाजापुर निवासी जयंत बघेरवाल, जो राजस्व विभाग में सहायक ग्रेड-तीन के पद पर 30 से अधिक वर्षों से बेदाग सेवा दे रहे हैं, उन्होंने अधिवक्ता यश नागर के माध ...और पढ़ें
Publish Date: Wed, 25 Mar 2026 11:02:46 PM (IST)Updated Date: Thu, 26 Mar 2026 07:16:36 AM (IST)
इंदौर हाई कोर्ट।HighLights
- अधिकारी ने रिपोर्ट में 35,000 और 15,000 रुपये घूस के आरोप सिद्ध नहीं पाए।
- बावजूद कलेक्टर ने प्रभाव के साथ दो वेतनवृद्धियां रोकने का आदेश दे दिया।
- कानूनी रूप से यह बड़ी सजा है, जिसके लिए पूर्ण विभागीय जांच अनिवार्य है।
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने शाजापुर कलेक्टर ऋजु बाफना के उस आदेश पर सख्त रुख अपनाते हुए स्थगित कर दिया, जिसमें बिना विभागीय जांच के ही एक कर्मचारी को बड़ी सजा दे दी गई थी।
न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लई ने 25 मार्च 2026 को आदेश देते हुए कलेक्टर से 15 दिनों के भीतर निजी हलफनामा तलब किया है कि बिना जांच के यह दंड कैसे दिया गया।
शाजापुर निवासी जयंत बघेरवाल, जो राजस्व विभाग में सहायक ग्रेड-तीन के पद पर 30 से अधिक वर्षों से बेदाग सेवा दे रहे हैं, उन्होंने अधिवक्ता यश नागर के माध्यम से यह याचिका दायर की थी।
याचिका में कलेक्टर के दिनांक 27 तथा 28 फरवरी 2025 के आदेशों तथा संभागायुक्त के दिनांक 11 दिसंबर 2025 के अपीलीय आदेश को चुनौती दी गई। हाई कोर्ट ने तीनों आदेशों पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है।
कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि कलेक्टर ने अपने क्षेत्राधिकार का उल्लंघन करते हुए बिना विवेक का प्रयोग किए यह दंड दिया। अपीलीय प्राधिकारी ने भी इस गंभीर चूक पर ध्यान नहीं दिया।
यह है पूरा मामला
- दिसंबर 2024 में शाहिद खान नामक एक ठेकेदार ने बघेरवाल के विरुद्ध रिश्वत लेने की शिकायत दर्ज कराई।
- यह वही ठेकेदार था जिसके विरुद्ध बघेरवाल ने पहले एफआईआर की सिफारिश की थी और 85,000 रुपये की वसूली भी शुरू कराई थी।
- शिकायत के बाद कलेक्टर ने नियम 14 के तहत अनिवार्य आरोप-पत्र जारी किए बिना ही 24 दिसंबर 2024 को केवल कारण बताओ नोटिस दे दिया।
- जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में 35,000 और 15,000 रुपये की रिश्वत के आरोप सिद्ध नहीं पाए।
- इसके बावजूद कलेक्टर ने 27 फरवरी 2025 को संचयी प्रभाव के साथ दो वेतनवृद्धियां रोकने का आदेश दे दिया। कानूनी रूप से यह बड़ी सजा है, जिसके लिए पूर्ण विभागीय जांच अनिवार्य है।
- अगले ही दिन 28 फरवरी को बघेरवाल को गुलाना एसडीओ कार्यालय में संबद्ध कर दिया गया। आरटीआई में सामने आया कि शिकायत में जिन वीडियो रिकार्डिंग का हवाला दिया गया, वे कभी आधिकारिक रिकार्ड पर थीं ही नहीं।
- 30 साल की सेवा पूरी होने पर 18 दिसंबर 2025 के तृतीय समयमान वेतन आदेश में भी बघेरवाल का नाम जानबूझकर छोड़ दिया गया, जबकि उनके जूनियर कर्मचारियों को यह लाभ दे दिया गया।