
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। भागीरथपुरा में दूषित पानी की वजह से हुई 36 लोगों की मौत के मामले में चल रही याचिकाओं में गुरुवार को सुनवाई हुई। कोर्ट ने महापौर परिषद सदस्य, पार्षद और तत्कालीन अपर आयुक्त का नाम याचिका में से हटाने को लेकर प्रस्तुत आवेदन पर नाराजगी जताई।
कोर्ट ने कहा कि पहले जनहित याचिका दायर करो, उसमें नामजद पक्षकार बनाओ, जांच की मांग करो और जब कोर्ट द्वारा गठित आयोग मामले की जांच कर रहा हो तो कुछ लोगों के नाम हटाने का आवेदन दो, यह ठीक नहीं है। अगर इसमें कुछ भी गड़बड़ी सामने आई तो कोर्ट भारी जुर्माना लगाएगी। कोर्ट अब मामले में ग्रीष्मावकाश के बाद सुनवाई करेगी।
भागीरथपुरा मामले को लेकर पांच जनहित याचिकाएं हाई कोर्ट में चल रही हैं। इसमें से एक में महापौर परिषद सदस्य अभिषेक शर्मा बबलू, पार्षद कमल वाघेला और तत्कालीन अपर आयुक्त रहे रोहित सिसोनिया भी प्रतिवादी के रुप में पक्षकार हैं।
याचिका में इन तीनों को घटना के लिए जिम्मेदार बताते हुए तीनों पर कार्रवाई की मांग की गई है। याचिकाओं की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मामले की जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक सदस्यीय जांच आयोग गठित किया है, जिसका कार्यकाल 30 जून तक है।
इसी बीच एमआइसी सदस्य, पार्षद और तत्कालीन अपर आयुक्त की ओर से उनका नाम याचिका में से हटाने के लिए आवेदन प्रस्तुत हुआ। गुरुवार को याचिकाकर्ता के वकील ने भी नाम हटाने को लेकर सहमति जताई जिसके बाद कोर्ट ने नाराजगी जताई। कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जब मामले की जांच चल रही है तो बीच में इस तरह का आवेदन लगाने का क्या मतलब है। क्या जल्दी है जो नाम हटवाने के लिए तत्परता दिखाई जा रही है। आयोग की रिपोर्ट में स्थिति स्पष्ट हो ही जाएगी।