
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। वैश्विक संकट के बीच इंदौर में हुई ब्रिक्स कृषि समूह की बैठक पूरी दुनिया के लिए आशा, विश्वास व सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश देती है। व्यापक विचार-विमर्श के बाद जो संयुक्त घोषणा पत्र आया है, उसे ‘इंदौर डिक्लेरेशन’ के नाम से जाना जाएगा। इसमें किसान को केंद्र में रखकर खाद्य सुरक्षा, पोषण, आजीविका, कृषि व्यापार, नवाचार, निवेश, क्लाइमेट रेज़िलिएंट खेती और सतत कृषि विकास को आगे बढ़ाने की साझा प्रतिबद्धता दर्ज है।
ये बातें केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने इंदौर में शनिवार को ब्रिक्स कृषि सम्मेलन के समापन पर आयोजित प्रेस वार्ता में कहीं। उन्होंने कहा कि यह दस्तावेज ब्रिक्स देशों की सामूहिक इच्छाशक्ति, साझा उत्तरदायित्व और कृषि को माध्यम बनाकर अधिक सुरक्षित, समृद्ध और टिकाऊ भविष्य गढ़ने की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। सदस्य देशों ने तय किया है कि इंदौर डिक्लेरेशन में दर्ज सभी पहलुओं को ज़मीन पर उतारने के लिए मिलकर, सामूहिक और सतत प्रयास किए जाएंगे।
बैठक में कृषि के क्षेत्र में परंपरागत खेती से लेकर डिजिटल नवाचार के माध्यम से ब्रिक्स देशों में कृषि संबंधित वैश्विक नेटवर्क तैयार करने पर चर्चा हुई। मंत्री चौहान ने कहा कि किसानों को सस्ती खाद मिलती रहेगी।
केंद्र सरकार अतिरिक्त खर्च वहन करेगी। ब्रिक्स में आए मेहमानों के जहन में इंदौर के छप्पन दुकान, राजवाड़ा और मांडू की सैर लंबे समय तक स्मृति के रूप में अंकित रहेगी।
ब्रिक्स समूह देशों का विश्व खाद्यान्न उत्पादन में 42 फीसद योगदान है।
ब्रिक्स सम्मेलन में 60 विदेशी प्रतिनिधियों सहित लगभग 100 लोगों ने भाग लिया।
यह नेटवर्क प्राकृतिक, जैविक और पुनर्योजी कृषि पद्धतियों पर संयुक्त रिसर्च, अनुभव-साझेदारी और क्षमता निर्माण का प्लेटफॉर्म बनेगा। इसके माध्यम से सदस्य देश एक-दूसरे से सीखकर जलवायु अनुकूल एवं टिकाऊ कृषि प्रणालियों को बढ़ावा देंगे।
परंपरागत व जैविक खेती और रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग को स्वीकार कर अब ब्रिक्स देशों ने इस नेटवर्क की स्थापना पर सहमति दी है। मेरठ का मोदीपुरम स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान केंद्र इसमें अहम भूमिका निभाएगा।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, भू-स्थानिक तकनीक, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा पर कृषि समाधानों को खोजने का प्रयास होगा। यह नेटवर्क आधुनिक प्रौद्योगिकी और कृषि नवाचार के बीच एक सशक्त सेतु का काम करेगा। कृषि तकनीकों को सीधे किसानों तक पहुंचाएंगे। इस नेटवर्क का समन्वय भारत में आईआईटी दिल्ली द्वारा किया जाएगा।
किसानों के बीज संबंधी अधिकार, देशी बीजों की विविधता और पारंपरिक ज्ञान की रक्षा करेंगे। नई किस्में और हाइब्रिड बीज के साथ देशी बीजों के संरक्षण के लिए यह प्लेटफॉर्म बनेगा।
यह सदस्य देशों के बीच कृषि आदानों, बीजों और आनुवंशिक संसाधनों के क्षेत्र में सहयोग को सुदृढ़ करेगा। अलग-अलग देशों में उपलब्ध श्रेष्ठ किस्में, जेनेटिक संसाधन और इनपुट्स की जानकारी साझा होगी।
ब्राजील में हुए ब्रिक्स सम्मेलन में ब्रिक्स कृषि अनुसंधान मंच की स्थापना हुई थी। इसे सशक्त कर ‘नॉलेज टू एक्शन हब‘ के रूप में विकसित करेंगे।
जलवायु अनुकूल और सतत कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करें। धरती आने वाली पीढ़ियों के लिए भी है।
अल-नीनो के संभावित प्रभाव के लिए देश अपनी पूरी तैयारियां कर रहे हैं, सूचनाओं के आदान-प्रदान से चुनौतियों का सामना करेंगे।
किसानों को यूरिया की बोरी 266 रुपये व डीएपी की बोरी 1350 रुपये में ही मिलेगी। बढ़ी लागत केंद्र सरकार वहन करेगी।